US-Israel-Iran War:अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का आज का एक महीना पूरा हो गया है। मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत कर दी है। इस क्षेत्र में अमेरिका के 3500 और मरीन सैनिक पहुंच गए हैं। मिडिल ईस्ट में सैन्य अभियानों की निगरानी करने वाले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की है कि USS Tripoli पर सवार होकर लगभग 3,500 अतिरिक्त सैनिक मध्य पूर्व पहुंच गए हैं। इस बीच पेंटागन ईरान में हफ्तों तक चलने वाले जमीनी अभियान की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह जहाज US के 'अमेरिका-क्लास' का एक बड़ा हमलावर युद्धपोत है, जो Tripoli Amphibious Ready Group और 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के फ़्लैगशिप के तौर पर काम करता है। पूरी टुकड़ी में लगभग 3,500 सैनिक शामिल हैं। वे लड़ाकू विमानों और हमलावर हेलीकॉप्टरों से लैस हैं, और समुद्री तथा जमीनी, दोनों तरह के माहौल में ऑपरेशन करने की क्षमता रखते हैं। यह तैनाती ईरान के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनज़र US द्वारा किए जा रहे बड़े सैन्य जमावड़े का हिस्सा है।
इस बड़े कदम से विशेषज्ञों और मीडिया के बीच यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वॉशिंगटन ईरान के अंदर संभावित जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्य पूर्व में सैन्य विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराना है।
इस नई तैनाती को ईरान के साथ युद्ध के लिए US की व्यापक सैन्य तैयारियों के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में हुई है जब ऐसी खबरें आ रही हैं कि पेंटागन इस क्षेत्र में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है, जिसका मकसद राष्ट्रपति ट्रंप को और अधिक सैन्य विकल्प उपलब्ध कराना है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कूटनीतिक रास्तों के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी मौजूद रहें। इन नए सैनिकों में पैदल सेना की टुकड़ियां और बख्तरबंद वाहन शामिल हो सकते हैं। उम्मीद है कि वे उन लगभग 5,000 मरीन और हज़ारों पैराट्रूपर्स के साथ शामिल होंगे, जिन्हें पहले ही इस क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया जा चुका है।
US सेंट्रल कमांड के अनुसार, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Epic Fury) के तहत अब तक 11,000 से ज़्यादा ठिकानों पर हमला किया गया है। यह ऑपरेशन 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इससे साफ पता चलता है कि यह संघर्ष बड़े पैमाने पर लड़ा जा रहा है। इसी बीच, तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कम से कम 10 US सैनिक घायल हो गए।
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन से ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए दक्षिणी इजरायल पर दूसरा हमला किया है। इन हमलों में समूह द्वारा महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे तब तक ऐसे अभियान जारी रखेंगे जब तक इजरायल ईरान और लेबनान पर अपने हमले बंद नहीं कर देता।
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