PM रोजगार सृजन योजना के नाम पर करोड़ों की ठगी, ग्रेटर नोएडा से 6 साइबर ठग गिरफ्तार

खबर सार :-
ग्रेटर नोएडा में पीएम रोजगार सृजन योजना के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए लोगों को झांसे में लेकर लाखों रुपये वसूलने वाले आरोपी अब पुलिस गिरफ्त में हैं। यह मामला बताता है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर फैल रहे ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

PM रोजगार सृजन योजना के नाम पर करोड़ों की ठगी, ग्रेटर नोएडा से 6 साइबर ठग गिरफ्तार
खबर विस्तार : -

PM EGP Scam Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएम ईजीपी) के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गौतमबुद्धनगर की बिसरख थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों को सब्सिडी वाले होम लोन का लालच देता था और फिर उनसे लाखों रुपये की ठगी करता था।

पुलिस के अनुसार, 13 मई को गोपनीय सूचना और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर सेक्टर-1 स्थित कृष्णा काउंटी टॉवर-ए की छत पर छापा मारा गया। यहां से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है। सभी आरोपी कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर इलाके के निवासी बताए जा रहे हैं।

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर डालते थे फर्जी विज्ञापन

जांच में सामने आया कि आरोपी इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़े आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करते थे। विज्ञापन में दावा किया जाता था कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बेहद कम ब्याज दर पर सब्सिडी वाला होम लोन उपलब्ध कराया जाएगा। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता था, उसे एक मोबाइल नंबर मिलता था। इसके बाद आरोपी खुद को सरकारी योजना से जुड़ा अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। भरोसा जीतने के बाद वे फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और अन्य शुल्कों के नाम पर रकम जमा करवाते थे।

एक व्यक्ति से 2 से 4 लाख रुपये तक वसूलते थे आरोपी

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी हर व्यक्ति से अलग-अलग बैंक खातों में दो लाख से चार लाख रुपये तक जमा करवाते थे। पैसे मिलने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर देते थे और पीड़ितों से संपर्क खत्म कर देते थे। इस तरह गिरोह ने देशभर के कई लोगों को अपना शिकार बनाया और करोड़ों रुपये की ठगी की। पुलिस ने बताया कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए की-पैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। साथ ही वे लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे, ताकि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस न कर सके।

पुलिस ने बरामद किए कई मोबाइल और दस्तावेज

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, 6 स्मार्टफोन और कॉलिंग डाटा से जुड़े 15 रजिस्टर बरामद किए हैं। इन रजिस्टरों में संभावित पीड़ितों की जानकारी, बैंक खातों का विवरण और कॉल रिकॉर्ड दर्ज मिले हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है। पुलिस अब गिरोह के कथित मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।

साइबर अपराधों को लेकर पुलिस ने लोगों को किया सतर्क

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना से जुड़े विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित विभाग से जानकारी जरूर जांच लें। सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी विज्ञापनों और अनजान नंबरों से आने वाले कॉल्स से सावधान रहने की सलाह दी गई है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब सरकारी योजनाओं के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को आसानी से निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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