नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले 'स्पेशल इंक्वायरी रिपोर्ट' (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी सियासी घमासान अब कानूनी चौखट पर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने टीएमसी (TMC) द्वारा लगाए गए धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर आईडी और एसआईआर (West Bengal SIR) से जुड़ी तमाम आपत्तियों का निपटारा 7 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा।
कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से सुप्रीम कोर्ट को प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunals) स्थापित किए गए हैं। इन न्यायाधिकरणों की सबसे खास बात यह है कि इनकी कमान कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस के हाथों में है। चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि इन ट्रिब्यूनल के लिए जजों और अधिकारियों की ट्रेनिंग आज पूरी हो जाएगी और कल से ही सुनवाई की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी जाएगी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जमीनी स्तर पर हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि "जिस गति से रोजाना पौने दो लाख से दो लाख तक आपत्तियों पर फैसले लिए जा रहे हैं, वह संतोषजनक है। यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनाव की दिशा में एक बड़ा कदम है।" सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जब भी न्यायाधिकरण किसी व्यक्ति के वोट डालने के अधिकार पर फैसला ले, तो उसके पीछे का स्पष्ट कारण एक अलग कॉलम में दर्ज किया जाए। यही अंतिम सूची तय करेगी कि बंगाल का कौन सा नागरिक वोट डाल पाएगा और कौन नहीं।
टीएमसी के वकील कल्याण बनर्जी ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी प्रक्रिया में दखल दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक-एक व्यक्ति 30,000 फॉर्म-6 (नया वोटर बनने का आवेदन) जमा कर रहा है, जिससे संदेह पैदा होता है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बेबुनियाद बयान देकर संदेह पैदा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह प्रक्रिया हर बार होती है और कुछ नया नहीं है। अगर आपको शिकायत है, तो आप कानूनी रूप से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।" चुनाव आयोग ने भी साफ किया कि नामांकन की अंतिम तिथि तक नाम जोड़ने का प्रावधान कानूनन वैध है।
एक तरफ जहाँ वोटर लिस्ट पर जंग जारी है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने के लिए भी गुहार लगाई गई है। 'सनातनी संस्था' नामक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि 2022 जैसे हिंसक हालात दोबारा न बनें, इसके लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक 'हाईलेवल मॉनिटरिंग कमेटी' बनाई जाए।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका की कॉपी सभी पक्षों को सौंपने का निर्देश दिया है। अब इस मुद्दे पर एसआईआर विवाद की अगली सुनवाई के दौरान विस्तार से चर्चा की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से साफ है कि वह चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से समझौता नहीं करेगा। 7 अप्रैल की समयसीमा बंगाल की राजनीति के लिए 'सुपर संडे' जैसा प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि इसी दिन लाखों वोटरों के भाग्य का फैसला होगा।
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