मुंबई : मुंबई में हाल ही में साइबर ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस ठगी में अपराधी Mahanagar Gas Limited (एमजीएल) के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। ठग लोगों को मैसेज और कॉल के माध्यम से यह विश्वास दिलाते हैं कि उनका गैस बिल बकाया है और यदि तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो उनका गैस कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। डर और जल्दबाजी की स्थिति पैदा करके वे लोगों को जाल में फंसा लेते हैं।
इस धोखाधड़ी की प्रक्रिया बहुत योजनाबद्ध होती है। सबसे पहले, पीड़ित को एक मैसेज भेजा जाता है जिसमें बकाया बिल का जिक्र होता है। इसके बाद ठग खुद को एमजीएल का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और समस्या को तुरंत हल करने का भरोसा दिलाते हैं। वे अक्सर एक छोटी राशि का भुगतान करवाते हैं, जिससे पीड़ित को लगता है कि प्रक्रिया वैध है। इसके बाद असली जाल शुरू होता है—ठग एक APK फाइल भेजते हैं और उसे डाउनलोड व इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं।
APK (Android Package Kit) फाइल एंड्रॉयड ऐप्स को इंस्टॉल करने के लिए उपयोग होती है, लेकिन जब यह फाइल किसी अनजान स्रोत से आती है, तो यह बेहद खतरनाक हो सकती है। जैसे ही पीड़ित इस फाइल को इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल फोन में मालवेयर सक्रिय हो जाता है। यह मालवेयर फोन के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच बना लेता है, जैसे कि SMS, OTP, बैंकिंग ऐप्स और यहां तक कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियां भी। इससे ठगों को पीड़ित के बैंक खातों तक सीधा एक्सेस मिल जाता है।
ऐसे मामलों में देखा गया है कि कुछ ही मिनटों में लाखों रुपए खातों से गायब हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक युवक से करीब 11.82 लाख रुपए और एक बुजुर्ग व्यक्ति से लगभग 8.59 लाख रुपए इसी तरीके से ठग लिए गए। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि यह साइबर अपराध बेहद तेजी और कुशलता से अंजाम दिया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, यह ठगी केवल तकनीकी नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है। ठग लोगों के डर, भ्रम और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वे ऐसी परिस्थितियां बनाते हैं जिसमें व्यक्ति बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कार्रवाई कर देता है। यही जल्दबाजी सबसे बड़ी गलती साबित होती है।
इस तरह की ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड नहीं करना चाहिए। किसी भी कॉल या मैसेज के आधार पर तुरंत भुगतान करने से बचना चाहिए। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से ही बिल का भुगतान करना चाहिए। इसके अलावा, OTP, बैंक डिटेल्स या PIN जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए और अपने बैंक को सूचित करना चाहिए। समय पर कार्रवाई करने से नुकसान को कम किया जा सकता है। जागरूकता और सावधानी ही इस तरह के साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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