हौसले की उड़ान हैं 90 फ़ीसदी दिव्यांग बसंत साहू, रंगों की भी खूब पहचान

खबर सार :-

90 फ़ीसदी दिव्यांग कला में माहिर बसंत साहू को मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिल चुका है। वह इन दिनों फिर चर्चा में हैं।
90 फ़ीसदी दिव्यांग, बसंत को मिल चुका राज्यपाल एवं राष्ट्रपति से पुरस्कार

खबर विस्तार : -

 

धमतरी : कला क्षेत्र में पारंगत लोग भी रंगों के सिलेक्शन में कई बार हार जाते हैं। वह चुनाव नहीं कर पाते हैं कि उन्हें किस रंग का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन 90 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद बसंत साहू ने कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार कला क्षेत्र में जीते हैं।

हर हुनर का सिलेक्शन करना है आसान 

 कला क्षेत्र में पारंगत होने के लिए केवल रंगों का सिलेक्शन ही पर्याप्त नहीं होता है। उनके पास भावनाओं, संवेदनाओं और कल्पनाओं के अलावा आत्म इच्छा शक्ति की भी जरूरत होती है। इस बात की कल्पना सब नहीं कर सकते हैं। धमतरी में आयोजित तीन दिवसीय रंग चित्रकला प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता में किसी ने अगर साबित किया है तो वह है एक दिव्यांग।

21 से 23 अगस्त तक लगाई एक प्रदर्शनी 

बसंत फाउंडेशन छत्तीसगढ़ कुरूद के तत्वावधान में 21 से 23 अगस्त तक छत्रपति शिवाजी मराठा मंगल भवन में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में कलाकार बसंत साहू की कलाकृतियां लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। उनकी कलाकृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले बसंत साहू को अब पहचान की जरूरत नहीं रही। उन्होंने अपनी कला को एक मजबूत हथियार बनाया है। वह एक दिव्यांग है, लेकिन उनकी पेंटिंग में ऐसे सभी गुण मौजूद हैं जो एक बड़े कलाकार में होती हैं। 

कलाकार कभी समय का इंतजार नहीं करता

प्रसिद्ध प्रदर्शनी में स्कूल के बच्चों ने भी हिस्सा लिया है। इन्होंने रंगों के संयोजन रेखांकन आकृतियां भावों और बारीकियां को जानने के लिए बसंत साहू को अपना आदर्श बनाया। उनसे चित्रकला के बहु उपयोगी गुरु सीखे। बच्चों ने बातचीत की तो प्रभावशाली चित्र और कलाकृतियों के बारे में बसंत ने बड़े प्यार से समझाया।

हजारों कलाकार बच्चों के मार्गदर्शक बने

उन्होंने बताया की ड्राइंग के साथ धैर्य लगातार प्रयास मन में कल्पना बहुत जरूरी होता है। एक कलाकार बच्चों को कम ही समय दे पता है, लेकिन यहां बसंत साहू ने बच्चों के साथ फोटो खिंचवाई और उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि किसी परिस्थिति का इंतजार कलाकार बनने के लिए नहीं करना चाहिए। हमेशा अपने मन में विश्वास बनकर शुरुआत करनी चाहिए। बसंत साहू की पेंटिंग प्रदर्शनी की शोभा बढ़ा रही हैं। 

जीवन रंग प्रदर्शनी है सभी मुश्किलों का समाधान 

राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ मुख्यमंत्री और राज्यपाल के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने चित्रों के जरिए कई कहानियां तैयार की हैं। इनमें प्रतिभा ग्रहण इच्छा शक्ति और शारीरिक सीमाएं एवं उनका मूल्यांकन आदि हैं। उन्होंने बताया कि शारीरिक सीमाएं कभी बाधक नहीं हो सकती हैं। प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि पूर्व विधायक कुरूद लेख राम साहू उपस्थित रहे। इस दौरान नगर पालिका कुरूद की अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, नगर पंचायत भखारा की अध्यक्ष ज्योति जैन, समाजसेवी सरिता दोषी, रितु राज पवार, कृष्णकांत साहू के अलावा बहुत सारे लोग पहुंचे हुए थे।

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लेख राम साहू ने कहा कि बसंत साहू की कलाकृतियां कला के प्रति समर्पण को प्रदर्शित कर रहे हैं और यह काबिले तारीफ हैं। उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और निरंतर मेहनत का परिणाम है। बसंत की मेहनत हजारों युवाओं को जिज्ञासा और प्रेरणा देती रहती है। कई स्थानों पर उनकी प्रदर्शनियां लग चुकी हैं। जीवन रंग प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया की प्रतिभा को अवसर मिले तो वह सीमाओं से आगे निकलकर अपनी पहचान बना लेती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला दिव्यांगजन पुरस्कार 

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद निवासी चित्रकार बसंत साहू को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय दिव्यांगजन पुरस्कार मिल चुका है। उनकी कला देश-विदेश तक सराही गई है। 1995 में एक सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से उनके शरीर का लगभग 90 हिस्सा निष्क्रिय हो गया। बिना किसी प्रशिक्षण के उन्होंने अपने हाथ में विशेष पट्टा बांधकर पेंटिंग शुरू की और अपनी अनूठी शैली से पहचान बनाई। 

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