कुवैत/वाशिंगटन : ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने सुबह दावा किया था कि उसने अमेरिका के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है, तब उस देश के नाम का खुलासा नहीं किया गया था। अब जाहिर हुआ है कि वह सैन्य प्रतिष्ठान कुवैत में मौजूद था। ईरान की इस कार्रवाई का जीसीसी, यानी गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, ने विरोध किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थीं, जिसे कुवैती सेना ने हवा में ही मार गिराया। अमेरिका ने इसे सीजफायर का गंभीर उल्लंघन बताया है। सेंटकाम के मुताबिक 27 मई की रात 10:17 बजे ईरान ने कुवैत की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल भेजी थी। अमेरिका ने कहा कि मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास 5 वन-वे अटैक ड्रोन भी भेजे थे, जिन्हें अमेरिकी सेना ने इंटरसेप्ट कर लिया। सेंटकाम ने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने बंदर अब्बास स्थित ईरानी ग्राउंड कंट्रोल साइट से छठा ड्रोन लॉन्च होने से भी रोक दिया। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरानी आक्रामकता से अपने सैनिकों और हितों की रक्षा के लिए सतर्क हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हुए मिसाइल हमले की कई खाड़ी देशों ने कड़ी निंदा की है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब ने इस हमले को कुवैत की संप्रभुता का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात ने अपने बयान में सीधे तौर पर ईरान का नाम लेते हुए इसे “आतंकी हमला” करार दिया। तीनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने सोशल मीडिया पर जारी बयानों में कहा कि वे कुवैत की सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता बनाए रखने के लिए उठाए गए हर कदम के साथ खड़े हैं।
इस बीच, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के महासचिव जसेम मोहम्मद अल बुदावी ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन हैं। उन्होंने कहा कि जीसीसी के सभी सदस्य देश कुवैत की सुरक्षा और उसके नागरिकों व निवासियों की रक्षा के लिए उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास के पास स्थित एक ईरानी ड्रोन बेस पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। सेंटकाम ने दावा किया था कि उसने ईरान के कुछ ड्रोन को मार गिराया है। इसके जवाब में ही आईआरजीसी ने सैन्य बेस पर हमले की बात कही थी।
पश्चिम एशिया में हालात एकबार फिर से तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। ताजा मामले में ईरान ने कुवैत में अमेरिकी बेस पर भीषण ड्रोन हमला किया है। वहीं, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने गुरुवार को कहा कि ईरान ने कुवैत की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की, जिसे कुवैती फोर्स ने सफलतापूर्वक रोक दिया।
सेंटकाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “27 मई को रात 10:17 बजे ईटी (अमेरिकी समय) पर, ईरान ने कुवैत की तरफ एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की, जिसे कुवैती सेना ने सफलतापूर्वक रोक दिया। बुधवार को, कुवैत आर्मी ने कहा कि देश के एयर डिफेंस दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं। सेना के जनरल स्टाफ के मुताबिक, जो भी धमाके सुनाई दे रहे हैं, वे वायु रक्षा प्रणाली के दुश्मन के हमलों को रोकने का नतीजा हैं।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने गुरुवार को इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “ईरान का आतंकवादी ड्रोन और मिसाइल हमला” बताया। यूएई के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) ने एक बयान में कहा, “ये आतंकवादी हमले कुवैत की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन हैं और उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं। मंत्रालय ने कुवैत के साथ यूएई की पूरी एकजुटता और इसकी सुरक्षा और स्थिरता को सुरक्षित रखने के सभी उपायों के लिए अपना समर्थन भी जताया।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऐसे किसी भी अरेंजमेंट से इनकार कर दिया, जिससे ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की इजाजत मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह रणनीतिक समुद्री रास्ता सभी देशों के लिए खुला रहेगा, भले ही उनकी सरकार तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर उसके साथ बातचीत जारी रखे।
व्हाइट हाउस में कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने कहा, "स्ट्रेट सभी के लिए खुला रहेगा। कोई भी इसे कंट्रोल नहीं करेगा। यह अंतरराष्ट्रीय पानी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने चल रही बातचीत के दौरान जरूरी तेल शिपिंग लेन पर कंट्रोल करने की कोशिश की थी, लेकिन चेतावनी दी कि अमेरिका इसकी इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा, “वे इसे कंट्रोल करना चाहेंगे। कोई भी इसे कंट्रोल नहीं करेगा।
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