पेरिस/काबुल: अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan) के बदतर होते हालात और महिलाओं पर तालिबानी बंदिशों के बीच सोशल मीडिया पर एक नया मोर्चा खुल गया है। इस बार निशाने पर हैं अफगानिस्तान की पूर्व मशहूर टीवी प्रेजेंटर और पत्रकार गोलाली करीमी। कभी काबुल के शमशाद टीवी और लेमर टीवी पर संजीदगी से खबरें पढ़ने वाली गोलाली आज पेरिस की सड़कों पर आजाद जिंदगी जी रही हैं, लेकिन उनका यही अंदाज उनके हमवतन लोगों को रास नहीं आ रहा। सोशल मीडिया पर उनकी नई लाइफस्टाइल और पहनावे को लेकर तीखी बहस छिड़ी है। कुछ लोग इसे अफगान संस्कृति पर हमला बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक महिला की व्यक्तिगत आजादी। इन तमाम आलोचनाओं के बीच गोलाली ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "अफगानिस्तान में औरतों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों की चिंता का विषय मेरे कपड़े बने हुए हैं।"
करीमी का यह सफर आसान नहीं रहा है। काबुल से भागकर फ्रांस पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से संवारा है। इंस्टाग्राम पर 2.8 लाख और टिकटॉक पर 2.3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ वे अब एक मॉडल के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। पेरिस में बेगम टीवी के लिए काम करने के बाद उन्होंने ग्लैमर इंडस्ट्री की तरफ रुख किया। हाल ही में 2 जून को जर्मन मीडिया संस्थान 'डॉयचे वेले दारी' ने उन पर एक विशेष वीडियो रिपोर्ट जारी की। इसका शीर्षक था- 'कंधार से पेरिस: गोलाली करीमी की विवादित कहानी'। इस रिपोर्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।
अपनी आलोचना करने वालों को गोलाली करीमी ने दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा, "मैं अब सिनेमा और मॉडलिंग की दुनिया में कदम रख चुकी हूं। जाहिर है, यहां का पहनावा अफगानिस्तान के पारंपरिक कपड़ों से बिल्कुल अलग होगा। मैं वही कपड़े पहनना चाहती हूं जिनमें मैं खुद को सेक्सी, सहज और खुश महसूस करूं।" ट्रोलर्स पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोगों की संकीर्ण मानसिकता का आलम यह है कि वे मेरे ग्लैमरस अंदाज को देखकर यह मान लेते हैं कि मैं किसी एडल्ट या सेक्सी फिल्मों में काम कर रही हूं। ऐसी बातें न सिर्फ बेतुकी हैं बल्कि मानसिक रूप से परेशान करने वाली भी हैं।
यह विवाद सिर्फ सोशल मीडिया की गालियों और ट्रोलिंग तक ही सीमित नहीं है। गोलाली ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में रहने वाले कुछ कट्टरपंथी अफगान नागरिकों ने उन पर शारीरिक हमला भी किया। सुरक्षा के इस गंभीर खतरे के कारण उन्हें पेरिस जैसे शहर में अब तक चार बार अपना घर बदलना पड़ा है। एक तरफ जहां वे अपनी मर्जी की जिंदगी जीने के लिए लड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनों का ही खौफ उनका पीछा नहीं छोड़ रहा।
गोलाली करीमी का यह पूरा मामला इस समय इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जहां एक धड़ा उनकी हिम्मत की दाद दे रहा है कि उन्होंने तालिबानी साए से निकलकर अपनी पहचान बनाई, वहीं दूसरा बड़ा हिस्सा इसे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ मानकर लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। लेकिन इन सबके बीच गोलाली ने यह साफ कर दिया है कि वे किसी के दबाव में आकर अपनी आजादी से समझौता नहीं करने वाली हैं।
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