Ali Larijani Death: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध (US-Israel Iran War) का आज 19वां दिन है। इस बीच ईरान के टॉप नेशनल सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी की मौत () हो गई है। अली लारीजानी इस जंग की शुरुआत से ही ईरान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति के मुख्य सूत्रधार बने हुए थे। बुधवार को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पुष्टि की है कि उसके सचिव अली लारीजानी एक हमले में मारे गए। लारीजानी की मौत मंगलवार सुबह हुई। इससे पहले मंगलवार को, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने ईरान पर अपने चल रहे हमलों के दौरान लारीजानी को मार गिराया था।
लारीजानी, अयातुल्ला अली खामेनेई के पूर्व सलाहकार थे। जानकारी के मुताबिक 67 वर्षीय लारीजानी की हत्या उस समय कर दी गई, जब वे तेहरान के बाहरी इलाके में अपनी बेटी से मिलने गए थे। इजरायली हमले में उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी समेत कई अन्य लोग भी मारे गए। उनकी मौत ईरान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। लारीजानी को इस युद्ध की शुरुआत के बाद से मारे गए दूसरे सबसे बड़े अधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है - सुप्रीम लीडर के बाद - क्योंकि उन्होंने देश के सैन्य अभियानों से जुड़े फ़ैसलों में अहम भूमिका निभाई थी। पिछले महीने, ईरान के सुप्रीम लीडर, अली खामेनेई भी अमेरिका-इजरायल के हमलों में मारे गए थे, और उनके बेटे, मोजतबा को नया नेता नियुक्त किया गया है।
बता दें कि लारीजानी (Ali Larijani) को इस्लामिक गणराज्य की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक माना जाता था, जिनका प्रभाव राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति तक फैला हुआ था। वह ईरान के सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवारों में से एक से आते थे। उनके भाई, सादेघ लारीजानी, न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे, जबकि मोहम्मद जवाद लारीजानी एक वरिष्ठ विदेश नीति सलाहकार थे।
3 जून 1958 को इराक के नजफ शहर में जन्में लारीजानी ने स्वयं कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिनमें 2008 से 2020 तक संसद के अध्यक्ष का पद और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख का पद शामिल है; यह परिषद रक्षा और विदेश नीति के मामलों में ईरान की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। वह ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के पूर्व सलाहकार थे।
उनकी मौत पर ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अली लारीजानी अपने बेटे और अंगरक्षक के साथ शहीद हो गए। SNSC ने उन्हें इस्लामी गणराज्य की सेवा करने वाले एक शहीद के रूप में वर्णित किया। परिषद ने एक बयान में कहा, "शहीदों की पवित्र आत्माओं ने ईश्वर के सेवक, शहीद डॉ. अली लारीजानी की पवित्र आत्मा को गले लगा लिया है।"
बताया जा रहा है कि लारीजानी ने अपनी मौत से एक हफ़्ता पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के जवाब में उन्हें एक गंभीर धमकी दी थी। लारीजानी ने कहा था, "ईरान जैसा बलिदान देने वाला राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे भी बड़े लोग ईरान को तबाह नहीं कर पाए। सावधान रहना, कहीं तुम खुद ही तबाह न हो जाओ।"
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