तमिलनाडु के खेतों में लहलहा रही अरब के खजूर की फसल, आधुनिक तकनीक से किसान लिख रहे सफलता की नई कहानी

खबर सार :-

तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में किसान खजूर की खेती कर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। कभी सऊदी अरब, इराक और मध्य-पूर्वी रेगिस्तानी देशों की पहचान रहने वाली खजूर की खेती अब तमिलनाडु में भी हो रही है।
तमिलनाडु के खेतों में लहलहा रही अरब के खजूर की फसल, आधुनिक तकनीक से किसान लिख रहे सफलता की नई कहानी

खबर विस्तार : -

धर्मपुरी: कभी मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, UAE और मध्य पूर्व के अन्य रेगिस्तानी देशों से जुड़ी खजूर की खेती अब तमिलनाडु की धरती पर सफलता की एक नई कहानी लिख रही है। आधुनिक तकनीकों और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए धर्मपुरी और कृष्णगिरि जिलों के कई किसानों ने कमर्शियल स्तर पर खजूर की खेती शुरू की है। अच्छी पैदावार और बाजार में अच्छे दाम मिलने की वजह से खेती का यह तरीका किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

खजूर के बाग तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर धर्मपुरी जिले के पलाकोड, मोरापुर, कंबाइनल्लूर और अरियाकुलम जैसे इलाकों में और साथ ही कृष्णगिरि जिले के सुलागिरी, बरगुर, कावेरीपट्टिनम और होसुर में। इन इलाकों की अपेक्षाकृत सूखी जलवायु और भरपूर धूप खजूर की खेती के लिए आदर्श मानी जाती है, जिससे और भी किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

मध्य पूर्व के अनुभव से बदली किस्मत

धर्मपुरी जिले के अरियाकुलम गांव के किसान एस. निजामुद्दीन इस बदलाव का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरे हैं। उन्होंने सऊदी अरब में खजूर के एक बाग में कई साल काम किया, जहां उन्होंने इस फसल की आधुनिक खेती की बारीकियां सीखीं। भारत लौटने पर उन्होंने उसी फसल को अपने गांव की जमीन पर उगाने का फैसला किया। उन्होंने एक प्रायोगिक प्रयास के तौर पर विदेश से टिश्यू-कल्चर से तैयार खजूर के पौधे मंगवाकर शुरुआत की। शुरुआती सफलता के बाद, उन्होंने धीरे-धीरे अपने बाग का विस्तार किया और अभी लगभग 15 एकड़ में खजूर की खेती कर रहे हैं। उनके बाग में खजूर की 35 से अधिक किस्में हैं, जिनमें बरही, मस्तूर, अम्मार, नूर और अजवा शामिल हैं।

35 से अधिक किस्मों की अलग-अलग खासियत

दुनियाभर में खजूर की 3,000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। इनमें से कई कमर्शियल किस्में अब धर्मपुरी की मिट्टी में भी उगाई जा रही हैं। किसान निजामुद्दीन के अनुसार, 'बरही' किस्म ने धर्मपुरी की अपेक्षाकृत सूखी जलवायु में भी बेहतरीन पैदावार दी है। वहीं, 'नूर' किस्म अपने स्वाद, मिठास और गुणवत्ता के कारण बाजार में काफी मांग में है। 'अजवा' जैसी लोकप्रिय किस्में भी उगाई जा रही हैं।

एक बार लगाने पर पीढ़ियों तक फल देता है

खजूर के पेड़ की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उम्र है। सही देखभाल मिलने पर खजूर का पेड़ कई दशकों तक लगातार फल देता है और लगभग 100 सालों तक फल देने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि किसान इसे लंबे समय का निवेश मानते हैं।

जून-जुलाई में होती है कटाई

खजूर की कटाई हर साल जून में शुरू होती है। हालांकि इस साल मौसम में उतार-चढ़ाव की वजह से कटाई में थोड़ी देरी हुई, फिर भी अच्छी पैदावार की उम्मीद है। बागों से ताजे खजूर तोड़े जा रहे हैं और सीधे व्यापारियों को भेजे जा रहे हैं।

200 से 600 रुपये तक कीमत 

कटाई के बाद, स्थानीय व्यापारी सीधे बागों से खजूर खरीदते हैं और उन्हें खुदरा बाजार में बेचते हैं। इसके अलावा, दूसरे राज्यों के व्यापारी भी बड़ी मात्रा में इनकी खरीद कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, किस्म और गुणवत्ता के आधार पर इनकी कीमत 200 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच होती है। कुछ बेहतरीन किस्मों की विदेशों में भी मांग है और उन्हें निर्यात के लिए खरीदा जा रहा है।

 

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