एक सप्ताह की मोहलत, फिर दिल्ली में आर-पार की लड़ाई! बहुजन अधिकार सेना ने प्रशासन को दी अंतिम चेतावनी
खबर सार :-
बहुजन अधिकार सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा अगले एक सप्ताह में उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।
खबर विस्तार : -
सुल्तानपुर: कलेक्ट्रेट कर्मचारियों से जुड़े एक प्रकरण में कार्रवाई की मांग को लेकर बहुजन अधिकार सेना ने जिला प्रशासन को एक सप्ताह का अंतिम समय दिया है। संगठन ने फिलहाल अपने प्रस्तावित दिल्ली कूच और सांसद भवन के निकट आमरण अनशन के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो राजधानी दिल्ली में व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
मंगलवार को राष्ट्रीय कमांडर विजय राणा चमार के आह्वान पर संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। संगठन का आरोप है कि कलेक्ट्रेट के बाबू, नायब नाजिर अलनेंद्र सिंह, डीएम स्टेनो तथा ओएसडी उमेश सिंह से जुड़े मामले में लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
इन्हीं मांगों को लेकर बहुजन अधिकार सेना ने पहले सांसद भवन, नई दिल्ली के निकट आमरण अनशन करने की घोषणा की थी। हालांकि आंदोलन शुरू होने से पहले पुलिस और प्रशासन की पहल पर उपजिलाधिकारी सदर उत्तम तिवारी ने संगठन के प्रतिनिधियों से वार्ता की। वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से मामले के समाधान के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।
प्रशासन के अनुरोध पर संगठन ने जनहित और संवाद की भावना को देखते हुए फिलहाल अपना प्रस्तावित आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। संगठन ने कहा कि यह स्थगन आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि प्रशासन को दिया गया अंतिम अवसर है। यदि एक सप्ताह के भीतर शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो दिल्ली में सांसद भवन के निकट आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिलता है तो वे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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