सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट में पेयजल संकट, बहुजन अधिकार सेना ने सौंपा ज्ञापन

खबर सार :-
कलेक्ट्रेट परिसर में पीने के पानी की गंभीर कमी का हवाला देते हुए, बहुजन अधिकार सेना ने जिला मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की गई है।

सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट में पेयजल संकट, बहुजन अधिकार सेना ने सौंपा ज्ञापन
खबर विस्तार : -

सुल्तानपुरः जनपद सुल्तानपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच पेयजल की गंभीर समस्या सामने आई है, जिससे अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर बहुजन अधिकार सेना ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की है।

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग परेशान

संगठन के राष्ट्रीय कमांडर विजय राणा चमार के नेतृत्व में और राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव एडवोकेट तिकलधारी गौतम के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर, जो जिले का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है, वहां स्वच्छ और ठंडे पेयजल की समुचित व्यवस्था पूरी तरह से नदारद है। रोजाना सैकड़ों लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए यहां पहुंचते हैं, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग, अधिवक्ता और दूर-दराज से आए वादकारी शामिल होते हैं। ऐसे में पानी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खासकर बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है। कई लोगों को घंटों तक बिना पानी के इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें शारीरिक थकान और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

तत्काल व्यवस्था करने की मांग

बहुजन अधिकार सेना ने इस स्थिति को जनहित और मानवाधिकारों के खिलाफ बताते हुए जिलाधिकारी से मांग की है कि वे स्वयं मौके का निरीक्षण करें और तत्काल प्रभाव से पेयजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। संगठन ने सुझाव दिया है कि परिसर में वाटर कूलर, पानी की टंकियां, हैंडपंप और जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

इसके साथ ही संगठन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो। फिलहाल, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और आमजन को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
 

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