श्रीगंगानगरः क्षेत्र के प्रतिष्ठित वास्तु इंजीनियर पवन के. गोयल को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गठित ‘विशेषज्ञ मूल्यांकन कमेटी’ का सदस्य मनोनीत किया गया है। यह श्रीगंगानगर जिले के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है कि शहर के एक विशेषज्ञ को केन्द्र स्तर की इस महत्वपूर्ण कमेटी में स्थान मिला है। उनकी नियुक्ति का आदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. अमनदीप गंग द्वारा जारी किया गया। इस कमेटी में देशभर से कुल 15 सरकारी एवं गैर-सरकारी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो पर्यावरण, तकनीकी और विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव रखते हैं।
सोमवार को सुखाड़िया सर्किल स्थित होटल प्रतीक प्लाजा में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया से बातचीत करते हुए पवन के. गोयल ने बताया कि यह कमेटी विभिन्न विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने से पहले उनका तकनीकी मूल्यांकन करती है। कमेटी का मुख्य कार्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों, हरित क्षेत्र के विकास, पुनर्वास योजनाओं और जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करना है। समीक्षा के बाद कमेटी संबंधित परियोजनाओं को स्वीकृति देने या अस्वीकृति की अनुशंसा सरकार को भेजती है।
उन्होंने बताया कि यह कमेटी हवाई अड्डे, हाईवे और एक्सप्रेस-वे, पोर्ट, टाउनशिप, जल एवं खनन परियोजनाएं, बिजली और तापीय ऊर्जा परियोजनाएं, औद्योगिक पार्क, बहुमंजिला भवन तथा सीवरेज योजनाओं सहित अनेक विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करती है। इसके अंतर्गत वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वायु गुणवत्ता, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, भूमि उपयोग परिवर्तन और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े विषयों पर विस्तृत तकनीकी विश्लेषण किया जाता है तथा उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं यूथ आइकॉन सौरभ जैन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर पवन के. गोयल ने कहा कि वे अपने क्षेत्र से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण तथा सीवरेज जैसी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी सुझाव विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने विशेष रूप से लालगढ़ एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के संदर्भ में भी तकनीकी जानकारी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की बात कही, ताकि इन योजनाओं को पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर तरीके से विकसित किया जा सके।
इंजी. पवन के. गोयल वर्ष 1982 से इंजीनियरिंग, वास्तु विज्ञान, मूल्यांकन और निर्माण से जुड़े तकनीकी परामर्श कार्यों में सक्रिय हैं। लंबे समय से इस क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्हें जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तथा देश-विदेश के कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2011 में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा उन्हें ‘ब्रह्मर्षि अलंकरण’ से सम्मानित किया गया था।
पवन के. गोयल वास्तुशास्त्र और जियो विज्ञान विषय पर सात पुस्तकों के लेखक भी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में भारतीय वास्तु शास्त्र, फेंग शुई, उत्तम वास्तु परिचय, वास्तु किरण तथा उत्तम वास्तु एंड जियो टेक (हिंदी-अंग्रेजी) शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक का भी गहन अध्ययन किया है और पर्यावरण अनुकूल निर्माण पद्धतियों पर लगातार कार्य कर रहे हैं।
सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। श्रीगंगानगर में वे कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। रोटरी क्लब ईस्ट, अग्रवाल सभा, विद्यार्थी शिक्षा सदन, नरसिंहपुरा गौशाला, राष्ट्रीय कला मंदिर तथा अग्रवाल सदन सहित अनेक संस्थाओं में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है।
अपनी नियुक्ति पर पवन के. गोयल ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया।
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