झांसी : महानगर में बिजली विभाग द्वारा ऊर्जा सुधार के दावों के बीच नई तकनीक उपभोक्ताओं के लिए गले की फांस बनती जा रही है। विभाग पुरानी व्यवस्थाओं को समेटकर पूरी तरह डिजिटल और 'स्मार्ट' होने की ओर अग्रसर है, लेकिन धरातल पर यह बदलाव लोगों की रातों की नींद उड़ा रहा है। विशेष रूप से 13 मार्च के बाद लागू हुई नई व्यवस्था ने उपभोक्ताओं को हैरान-परेशान कर दिया है।
महानगर के लगभग पौने दो लाख उपभोक्ताओं में से अब तक 91 हजार घरों में स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 76 हजार मीटरों को 'प्रीपेड' मोड पर शिफ्ट कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही आपके मीटर का बैलेंस 'जीरो' होता है, बिजली की आपूर्ति बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप कट जाती है। 14 मार्च को इस सिस्टम का असर तब देखने को मिला जब महानगर के करीब 1500 घरों की बिजली अचानक गुल हो गई। लोग परेशान होकर पावर हाउस दौड़े, तो पता चला कि यह सब स्मार्ट मीटर के प्रीपेड सिस्टम के कारण हुआ है।
मंगलवार को उपभोक्ताओं की इस समस्या को लेकर पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य अभियंता से मिला। पार्षद आशीष चौकसे ने बताया कि दिन में तो उपभोक्ता जैसे-तैसे कार्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन यदि रात के समय बैलेंस खत्म होने से बिजली कट जाए, तो परिवार को पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। इस दौरान एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया। जब पार्षद ने मुख्य अभियंता से मोबाइल पर 'कंज्यूमर ऐप' चलाने की प्रक्रिया समझनी चाही, तो विभाग के पास भी कोई ठोस जवाब नहीं था। पार्षद के मोबाइल पर ओटीपी (OTP) न आने की समस्या ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया।
स्मार्ट मीटर से जुड़ी इन तमाम दुश्वारियों के बीच डीवीवीएनएल झांसी क्षेत्र के मुख्य अभियंता के.पी. खान ने स्पष्ट समाधान सुझाया है। विभाग का मानना है कि उपभोक्ताओं को इस नई डिजिटल व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा, जिसके लिए 'स्मार्ट मीटर कंज्यूमर ऐप' एक अनिवार्य कड़ी है। विभाग के अनुसार, उपभोक्ताओं को सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में बिजली विभाग का आधिकारिक एप्लीकेशन डाउनलोड करना चाहिए। हालांकि, यहाँ एक तकनीकी पेंच यह है कि यह ऐप केवल उसी मोबाइल नंबर से सक्रिय (एक्टिवेट) होगा, जो विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में पहले से पंजीकृत है। एक बार ऐप चालू हो जाने के बाद उपभोक्ता न केवल अपनी दैनिक बिजली खपत पर नजर रख सकेंगे, बल्कि अपने खाते में बचे हुए बैलेंस की सटीक जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।
वहीं, दूसरी ओर उपभोक्ताओं की एक बड़ी शिकायत यह रही है कि बिजली कटने से पहले उन्हें किसी भी प्रकार का चेतावनी संदेश या अलर्ट प्राप्त नहीं हो रहा है। इस गंभीर समस्या पर विभाग ने अपनी स्थिति साफ करते हुए बताया है कि ऑटोमेटिक मैसेज सिस्टम केवल उन्हीं नंबरों पर अलर्ट भेज रहा है जो बिजली विभाग के डेटाबेस में दर्ज हैं। विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता का मोबाइल नंबर विभाग के पास अपडेट नहीं है, तो उन्हें बिजली गुल होने से पहले कोई सूचना मिलना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे अपने संपर्क विवरण को विभाग के पास तत्काल अपडेट कराएं ताकि भविष्य में अंधेरे का सामना न करना पड़े।
स्मार्ट मीटर की इस तकनीकी उलझन और अचानक होने वाली बिजली कटौती से बचने के लिए उपभोक्ताओं को अब अपनी कार्यप्रणाली में थोड़ा बदलाव लाना होगा। यदि आप भी चाहते हैं कि जीरो बैलेंस होने पर आपके घर की बत्ती गुल न हो, तो सबसे पहले विभाग के हेल्प डेस्क या निकटतम कार्यालय जाकर अपना वर्तमान और सक्रिय मोबाइल नंबर बिजली विभाग के रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। विभाग का स्पष्ट कहना है कि बिना पंजीकृत मोबाइल नंबर के उपभोक्ताओं तक अलर्ट मैसेज पहुंचना संभव नहीं है। नंबर अपडेट होने के बाद, अपने स्मार्टफोन में विभाग का 'कंज्यूमर ऐप' इंस्टॉल करें और समय-समय पर अपनी बिजली खपत और शेष बैलेंस की निगरानी करते रहें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ता बैलेंस पूरी तरह खत्म होने का इंतजार न करें; स्मार्ट मीटर को मोबाइल की तरह ही समय से पहले रिचार्ज करने की आदत डालें। डीवीवीएनएल झांसी क्षेत्र के मुख्य अभियंता के.पी. खान ने भी इस बात पर विशेष जोर दिया है कि उपभोक्ता स्वयं आगे आकर अपनी जानकारी दुरुस्त कराएं। बिजली गुल होने जैसी अप्रिय स्थिति और रात के समय होने वाली परेशानियों से बचने का यही एकमात्र सुरक्षित तरीका है। जब तक उपभोक्ता नई डिजिटल व्यवस्था के साथ तालमेल नहीं बिठाएंगे, तब तक इस 'स्मार्ट' सिस्टम की पेचीदगियां उन्हें परेशान करती रहेंगी।
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