शाहपुरा: राजस्थान की गौरवशाली माटी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक वैभव को वैश्विक पटल पर चमकाने के सरकारी दावों को धरातल पर किस कदर पलीता लगाया जा रहा है, इसका जीता-जागता उदाहरण शाहपुरा में देखने को मिला। यहां चल रहे अति-महत्वपूर्ण Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन की कछुआ चाल को देखकर अब आला अधिकारी अपना आपा खो चुके हैं। बुधवार की देर रात अचानक शाहपुरा पहुंचे राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने जब निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया, तो वहां पसरी बदइंतजामी और सुस्ती को देखकर उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं और ठेकेदारों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि राष्ट्रभक्ति की प्रतीक इन धरोहरों के निर्माण में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता और समयसीमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्राधिकरण के अध्यक्ष लखावत आधी रात को बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे केसरी सिंह बारहठ पेनोरमा और रामस्नेही पेनोरमा के निर्माण स्थलों (Construction Sites) पर पहुंचे थे। वहां काम की कछुआ रफ्तार को देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। विशेषकर स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ के जीवन को दर्शाने वाले इस प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को खरी-खोटी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई मामूली भवन नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों की स्मृति का जीवंत केंद्र है। लखावत ने सख्त हिदायत दी कि इस Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन में अब किसी भी तरह की कोताही पाई गई, तो संबंधित एजेंसी पर सीधे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
निरीक्षण के दौरान लखावत का रुख बेहद आक्रामक रहा। उन्होंने बारीकी से पत्थरों और सीमेंट की जांच की। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किया कि भवन निर्माण (Building Construction) में केवल जोधपुर के सूरसागर से आने वाले उच्च श्रेणी के सैंडस्टोन (Sandstone) का ही उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमारत का बाहरी ढांचा जितना आकर्षक दिखे, उसकी नींव और आंतरिक संरचना भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। फर्श की छोरिंग (Flooring) और छत की सीलिंग (Ceiling) के कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने तकनीकी अधिकारियों को डांट लगाते हुए कहा कि कागजों पर मॉनिटरिंग बंद करके जमीन पर काम की प्रगति दिखाई देनी चाहिए, क्योंकि भावी पीढ़ी के लिए यह इतिहास का एक अमूल्य दस्तावेज बनने जा रहा है। इसलिए इस Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
इसके तुरंत बाद, प्राधिकरण अध्यक्ष का काफिला रामस्नेही पेनोरमा की ओर मुड़ा। वहां मुख्य परिसर की अधूरी दीवारों को देखकर उन्होंने मानसून (Monsoon) के आगमन से पहले सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षा ऋतु में पानी भरने से नींव कमजोर हो सकती है, इसलिए बारिश की पहली बूंद गिरने से पहले इस Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन के मुख्य ढांचे को एक सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने इंजीनियरों को साफ कहा कि वे अपनी दैनिक प्रगति रिपोर्ट सीधे जयपुर मुख्यालय भेजना शुरू करें ताकि लापरवाही की कोई गुंजाइश न बचे।
मौके पर उपस्थित पूर्व पालिका अध्यक्ष रघुनंदन सोनी और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सिंह जाड़ावत ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण जनभावना को अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने मांग की कि इस पूरे परिसर को कंक्रीट के जंगल में बदलने के बजाय चारों तरफ सघन और औषधीय पौधारोपण (Plantation) कराया जाए, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को एक बेहतरीन सांस्कृतिक और प्राकृतिक परिवेश का अनुभव मिल सके। अध्यक्ष लखावत ने इस सुझाव को बेहद संजीदगी से लिया और अधिकारियों को परिसर में बेहतर लैंडस्केपिंग और बागवानी विकसित करने के आदेश दिए।
इस कड़े निरीक्षण अभियान को पूरा करने के बाद ओंकार सिंह लखावत सीधे महाराणा प्रताप स्मारक पहुंचे, जहां उन्होंने देश के स्वाभिमान के प्रतीक राष्ट्रनायक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर बोलते हुए कहा कि महाराणा प्रताप किसी एक क्षेत्र के नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के गौरव हैं। राज्य सरकार अब उनके शौर्य से जुड़े सभी ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़कर एक विशेष महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट (Tourist Circuit) का निर्माण कर रही है, जिसमें यह Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन भी एक बेहद अहम कड़ी साबित होगा। उन्होंने समाज से भी आह्वान किया कि अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
अचानक हुए इस औचक निरीक्षण के दौरान पूर्व चेयरमैन रघुनंदन सोनी, कैलाश सिंह जाड़ावत, राजू सोलंकी, पवन कुमार शर्मा, शहीद प्रताप सिंह बारहठ सेवा संस्थान के वरिष्ठ सदस्य रामप्रसाद सेन, ओम लुहार, कैलाश मेहडू, रघुवीर सिंह और जगदीश प्रसाद पारीक सहित लोक निर्माण विभाग के अभियंता राजावत और निर्माण कंपनी के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस कड़े रुख के बाद अब क्षेत्र के आम जनमानस में यह उम्मीद जगी है कि सालों से लटका हुआ यह Shahpura Panorama Project Construction (शाहपुरा पेनोरमा प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन अब बहुत जल्द ही अपने असली स्वरूप में आकर शाहपुरा की ऐतिहासिक पहचान को एक नई और भव्य उड़ान देगा।
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