TET पूर्व नियुक्त शिक्षकों को संरक्षण देने की मांग, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन
खबर सार :-
महासंघ के मीडिया प्रभारी सौरभ कार्तिकेय ने सरकार से मांग की कि टीईटी पूर्व नियुक्त शिक्षकों को स्पष्ट विधायी एवं नीतिगत संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि उनके सेवा अधिकार सुरक्षित रह सकें और भविष्य को लेकर व्याप्त असमंजस समाप्त हो सके।
खबर विस्तार : -
सोनभद्र: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश की सोनभद्र इकाई ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। संगठन ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा करते हुए उन्हें विधायी एवं नीतिगत संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग उठाई।
ज्ञापन के माध्यम से महासंघ ने कहा कि वर्ष 2010 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी अधिसूचना तथा हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का वातावरण बना हुआ है। संगठन का कहना है कि ऐसे शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जिला अध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमावली और निर्धारित पात्रता मानकों के आधार पर की गई थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए नियमों या मानकों के आधार पर उनके सेवा अधिकारों को प्रभावित करना उचित नहीं होगा।
जिला महामंत्री इंदू प्रकाश सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के कारण प्रदेश के लाखों शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने तत्कालीन नियमों के अनुरूप नियुक्ति प्राप्त की है, उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाकर शिक्षकों की शंकाओं का समाधान किया जाए।
जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था के अनुसार कोई भी नियम सामान्य रूप से उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी माना जाता है। इसलिए टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए प्रावधानों का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा सुरक्षा और न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित करना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन मंत्री गणेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षकों की चिंताओं का समाधान करेगी।
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