Veterinary Hospital Construction : शाहपुरा में भ्रष्टाचार पर चला विधायक का डंडा: 4.16 करोड़ का अस्पताल बना 'मिट्टी का ढेर'

खबर सार :-
Veterinary Hospital Construction : शाहपुरा में आसींद रोड पर बन रहे 4.16 करोड़ के पशु चिकित्सालय निर्माण (veterinary hospital construction) में भारी भ्रष्टाचार! हाथ लगाते ही ढहने लगी दीवारें। भड़के विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने मौके पर रुकवाया काम, अफसरों को पिलाई घुट्टी और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश।
Veterinary Hospital Construction : शाहपुरा में भ्रष्टाचार पर चला विधायक का डंडा: 4.16 करोड़ का अस्पताल बना 'मिट्टी का ढेर'
खबर विस्तार : -

शाहपुरा: सरकारी पैसों का दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों की अब खैर नहीं है। राजस्थान के शाहपुरा (Shahpura) में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए को पानी की तरह बहाया जा रहा था। आसींद रोड (Asind Road) पर बन रहे 4 करोड़ 16 लाख रुपए की भारी-भरकम लागत वाले बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय (Multipurpose Veterinary Hospital) के निर्माण में भयंकर धांधली और घटिया सामग्री (poor quality materials) के इस्तेमाल का पर्दाफाश हुआ है।

इस भ्रष्टाचार (corruption) को किसी और ने नहीं, बल्कि शाहपुरा के क्षेत्रीय विधायक डॉ. लालाराम बैरवा (MLA Dr. Lalaram Bairwa) ने खुद रंगे हाथों पकड़ा। विधायक ने जब औचक निरीक्षण (surprise inspection) किया, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। निर्माण कार्य की बदतर स्थिति को देखकर विधायक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और कड़े शब्दों में कहा, "फालतू की बकवास मत करो!" इसके साथ ही उन्होंने तत्काल प्रभाव से पूरे निर्माण कार्य को रुकवा दिया और आरोपी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई (legal action) करने के सख्त निर्देश जारी किए।

 हाथ लगाते ही ढहने लगी दीवारें, तकनीकी मानकों की उड़ी धज्जियां

जब विधायक डॉ. लालाराम बैरवा आसींद रोड पर निर्माणाधीन पशु चिकित्सालय (veterinary hospital construction) की साइट पर पहुंचे, तो वहां चल रहा काम पूरी तरह से कागजी दावों के विपरीत मिला। विधायक ने जब खुद आगे बढ़कर दीवारों की मजबूती जांचनी चाही, तो सच सामने आ गया। दीवारों की चिनाई इतनी कमजोर और घटिया दर्जे की थी कि सिर्फ हाथ लगाने मात्र से ही पत्थर और सीमेंट का मसाला टूटकर नीचे गिरने लगा।

विधायक ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशाषी अभियंता (Executive Engineer) को तुरंत फोन कर मौके पर तलब किया। अधिकारियों के सामने ही उन्होंने बिखरती हुई दीवारों को दिखाया और पूछा कि क्या इसी तरह सरकारी इमारतों का निर्माण किया जाता है? भवन निर्माण में उपयोग की जा रही बजरी, गिट्टी और रेत की गुणवत्ता (quality of sand and gravel) बेहद निचले स्तर की थी। विधायक ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों से कहा कि जनता के पैसों से बनने वाली इस इमारत में इस तरह का जानलेवा खेल खेलने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। यह घटिया निर्माण भविष्य में बेजुबान जानवरों और अस्पताल के स्टाफ के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

 अफसरों ने बनाने चाहे बहाने, तो विधायक ने लगाई जबरदस्त फटकार

औचक निरीक्षण (surprise inspection) के दौरान जब पोल खुलने लगी, तो मौके पर मौजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी और ठेकेदार के नुमाइंदे अपनी कमियों को छिपाने के लिए अजीबोगरीब स्पष्टीकरण और बहाने बनाने लगे। इस पर विधायक डॉ. लालाराम बैरवा का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया। उन्होंने अफसरों को डांटते हुए कहा कि वे अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए बहाने बनाना बंद करें और अपना पूरा ध्यान निर्माण की गुणवत्ता (construction quality) को सुधारने में लगाएं।

विधायक ने स्पष्ट आदेश दिया कि इस पूरे घटिया निर्माण को तुरंत प्रभाव से ध्वस्त किया जाए और जितनी भी घटिया सामग्री (poor quality materials) साइट पर पड़ी है, उसे वहां से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक तकनीकी मानकों (technical standards) के अनुरूप सामग्री का इंतजाम नहीं होता, तब तक काम शुरू नहीं होगा। दोबारा होने वाला पूरा काम पूरी तरह से सरकारी नियमों और उच्च मानकों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

 अवैध खनन और राजस्व चोरी का भी लगा संगीन आरोप

इस पूरे मामले में केवल घटिया निर्माण का ही खेल नहीं चल रहा था, बल्कि इसके पीछे एक बड़े अवैध नेटवर्क की बू भी आ रही है। विधायक ने मौके पर पाया कि निर्माण कार्य में जो मिट्टी और अन्य सामग्रियां इस्तेमाल की जा रही हैं, वे आसपास के क्षेत्रों से अवैध रूप से उठाई जा रही हैं। इसके लिए खनिज विभाग (Mineral Department) और राजस्व विभाग (Revenue Department) से कोई भी कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी।

विधायक डॉ. बैरवा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह न केवल निर्माण में धांधली है, बल्कि सरकारी राजस्व की सीधी चोरी भी है। उन्होंने अधिकारियों को इस अवैध खनन (illegal mining) के पहलू की भी गहराई से जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि इस जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उस पर इतनी सख्त कार्रवाई होगी कि भविष्य में कोई भी ठेकेदार ऐसी हिम्मत नहीं कर पाएगा। अगर समय रहते इसकी जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने पर जवाबदेही किसकी होगी?

 जनता ने भी खोली पोल, कहा- "शुरू से ही चल रहा था धांधली का खेल"

विधायक के इस औचक निरीक्षण (surprise inspection) के दौरान बड़ी संख्या में शाहपुरा के स्थानीय नागरिक और भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर जमा हो गए। स्थानीय लोगों ने विधायक के सामने ठेकेदार की मनमानी का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि इस पशु चिकित्सालय (veterinary hospital construction) के काम में पहले दिन से ही घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर जब भी लोगों ने इसका विरोध करने की कोशिश की, तो उनकी आवाज़ को दबा दिया गया। विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने जनता की इन सभी शिकायतों को बेहद ध्यान से सुना और स्थानीय नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों पर पूरी पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने जनता के सामने वादा किया कि किसी भी दोषी को, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।

 "जनता के एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा"

डॉ. लालाराम बैरवा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री विकास कार्यों के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार का एकमात्र लक्ष्य जनता को बेहतर से बेहतर बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। ऐसे में कुछ भ्रष्ट मानसिकता के लोग और ठेकेदार अपनी जेबें भरने के लिए सरकार की साख और जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता (transparency), जवाबदेही (accountability) और गुणवत्ता (quality) सबसे ऊपरी प्राथमिकता है। यदि ठेकेदार ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो उसे ब्लैकलिस्ट (blacklist) किया जाएगा। इसके साथ ही, यदि विभागीय अधिकारियों ने इसकी नियमित निगरानी (regular monitoring) में ढिलाई बरती, तो उन अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ भी बड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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