ग्रामीण रोजगार पर संकट: सांसद कुलदीप इंदौरा ने केंद्र सरकार की नीतियों को बताया मजदूर विरोधी

खबर सार :-
हनुमानगढ़ दौरे पर सांसद कुलदीप इंदौरा ने मनरेगा में बदलाव को मजदूर विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला। जानिए ग्रामीण रोजगार संकट की पूरी खबर।

ग्रामीण रोजगार पर संकट: सांसद कुलदीप इंदौरा ने केंद्र सरकार की नीतियों को बताया मजदूर विरोधी
खबर विस्तार : -

श्रीगंगानगर: हनुमानगढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद कुलदीप इंदौरा ने अपने हनुमानगढ़ प्रवास के दौरान ग्रामीण इलाकों में चल रहे मनरेगा कार्यों की जमीनी हकीकत को परखा। इसी क्रम में वे ग्राम पंचायत पक्का भादवा (14 जेडी डब्ल्यू) पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों के साथ बैठकर संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। मजदूरों से बातचीत के दौरान सांसद इंदौरा ने केंद्र सरकार की हालिया रोजगार नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के स्वरूप में किए जा रहे बदलाव ग्रामीण गरीबों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। उनका आरोप था कि योजना का नाम बदलने और उसमें जटिल नियम जोड़ने से मजदूरों को काम मिलने की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो गई है।

नाम बदला, अधिकार घटे: कागजों में रोजगार, जमीन पर बेरोजगारी

सांसद ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर किया जा रहा है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी)’ जैसे नए ढांचे के तहत नियमों को इतना सख्त बना दिया गया है कि जरूरतमंद मजदूर भी काम से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने इसे गरीबों के हक पर सीधा प्रहार बताया। कुलदीप इंदौरा ने केंद्र सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर 125 दिन रोजगार देने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर बजट में कटौती कर राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। परिणामस्वरूप कई पंचायतों में काम स्वीकृत ही नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सिर्फ आंकड़ों में अच्छी दिखती है, जबकि हकीकत में मजदूर खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

किसानों और मजदूरों पर दोहरी चोट, आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि कृषि कार्यों के दौरान मनरेगा को 60 दिनों तक रोकने का नियम भूमिहीन मजदूरों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। ऐसे मजदूरों के पास न तो खुद की जमीन होती है और न ही वैकल्पिक रोजगार। ऐसे में जब सरकारी योजना भी बंद कर दी जाती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। सांसद इंदौरा ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के श्रमिकों की आवाज संसद तक पहुंचाई जा रही है। यदि केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो सड़क से संसद तक व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला श्रमिक, ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मजदूरों ने सांसद को तकनीकी कारणों से काम अटकने, भुगतान में देरी और ऑनलाइन प्रक्रियाओं से जुड़ी दिक्कतों की जानकारी भी दी।

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