झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी महानगर में मंगलवार को नगर निगम की सियासत उस समय गरमा गई जब अवैध होर्डिंग हटाने की कार्रवाई ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। एक पार्षद के पुत्र की शादी के स्वागत में लगाए गए कट-आउट्स को नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद, पार्षदों ने एकजुट होकर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। घंटों तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे में नारेबाजी, धरना और अधिकारियों की तालाबंदी जैसे नजारे देखने को मिले।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब नगर निगम की टीम ने शहर के प्रमुख चौराहों से पार्षद पुत्र की शादी से संबंधित अवैध होर्डिंग और कट-आउट्स जप्त कर लिए। पार्षदों का आरोप है कि निगम प्रशासन 'चुनिंदा' कार्रवाई कर रहा है। उनका कहना है कि पूरे शहर में रसूखदारों और नेताओं के अवैध पोस्टर लगे हुए हैं, लेकिन केवल एक पार्षद को निशाना बनाना द्वेषपूर्ण है। पार्षदों ने दोपहर बाद नगर निगम के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया और जमकर नारेबाजी की। आलम यह था कि आंदोलित पार्षदों ने अधिकारियों को कार्यालय के भीतर प्रवेश तक नहीं करने दिया। लगभग 5 से 6 घंटे तक नगर निगम परिसर छावनी बना रहा और भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी।
नगर निगम परिसर के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठे पार्षदों का आक्रोश केवल होर्डिंग हटाने की कार्रवाई तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गहरे सवाल खड़े किए। इस दौरान उपसभापति आशीष तिवारी ने कड़े शब्दों में नगर निगम के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से झांसी महानगर में विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। सड़कों की हालत खस्ताहाल है और जगह-जगह गड्ढे होने के कारण जनता परेशान है। उन्होंने व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि जब क्षेत्र की जनता हमसे विकास को लेकर सवाल पूछती है, तो हमारे पास कोई जवाब नहीं होता क्योंकि अधिकारी पार्षदों की बातों को पूरी तरह अनसुना कर उन्हें उपेक्षित महसूस करा रहे हैं।
विवाद की आग में घी डालने का काम उन भ्रष्टाचार के आरोपों ने किया, जिन्हें पार्षदों ने जोर-शोर से उठाया। धरने के दौरान डीजल चोरी का मुद्दा एक बार फिर गरमाया; पार्षदों का सीधा आरोप है कि डीजल चोरी का बड़ा प्रकरण उजागर होने के बावजूद उच्च अधिकारी अपने चहेते अफसरों को बचाने में लगे हैं और दोषियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके साथ ही, शहर के पार्किंग ठेकों में हुए कथित घोटाले और अनियमितताओं पर भी प्रशासन की चुप्पी को लेकर सवाल दागे गए। पार्षदों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ एक ओर रसूखदारों को संरक्षण दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और जनप्रतिनिधियों पर मामूली सी बात या शादी के होर्डिंग लगाने पर भी मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। इन तमाम मुद्दों ने नगर निगम के भीतर चल रही खींचतान को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शहर को सुंदर बनाने और राजस्व की हानि रोकने के लिए अवैध होर्डिंग के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सुबह से कार्यालय में मौजूद थीं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त होने के कारण तुरंत वार्ता संभव नहीं थी। उन्होंने पार्षदों को अगले दिन वार्ता का आश्वासन भी दिया था।
मामले को बढ़ता देख नगर मजिस्ट्रेट प्रमोद झा और अपर नगर आयुक्त राहुल यादव ने पार्षदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पार्षद उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े रहे। अंततः देर रात सदर विधायक रवि शर्मा और महापौर बिहारी लाल आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने पार्षदों की शिकायतों को सुना और उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद रात लगभग 11:00 बजे पार्षदों ने अपना धरना समाप्त किया।
झांसी के इलाइट चौराहे जैसे प्रमुख स्थलों पर अवैध होर्डिंग की समस्या पुरानी है। निगम की आय का एक बड़ा हिस्सा वैध विज्ञापन स्टैंड्स (कैंटीलेवर, यूनिपोल) से आता है। जब प्रभावशाली लोग इन नियमों को ताक पर रखकर अवैध सामग्री लगाते हैं, तो न केवल शहर की सुंदरता बिगड़ती है बल्कि निगम को आर्थिक चपत भी लगती है। हालांकि, प्रशासन की कार्रवाई में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी अक्सर ऐसे विवादों को जन्म देती है।
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