गौतमबुद्धनगर में 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता, जनपद में सड़क हादसों और मौतों में आई बड़ी कमी

खबर सार :-
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के मकसद से संचालित जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट परियोजना में बड़ी सफलता हासिल की है। यह पहल सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। इसके जरिए जिले में सड़क हादसों और मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
गौतमबुद्धनगर में 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता, जनपद में सड़क हादसों और मौतों में आई बड़ी कमी
खबर विस्तार : -

गौतमबुद्ध नगर : गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 

परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए किया गया विशेष टीमों का गठन 

पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, सेफ लाइफ फाउंडेशन, उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में यह परियोजना नवंबर 2025 से प्रभावी रूप से लागू की गई थी। परियोजना के तहत उन 9 थाना क्षेत्रों और दो क्रिटिकल कॉरिडोर को चिन्हित किया गया था, जहां जिले में होने वाली कुल सड़क दुर्घटना जनहानि का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता था।

लगातार निगरानी, सख्त प्रवर्तन और सड़क सुरक्षा उपायों के कारण गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट ने उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में सर्वाधिक कमी दर्ज करने का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बनाया है। परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए क्रिटिकल कॉरिडोर पर विशेष सीसी (क्रिटिकल कॉरिडोर) टीमों का गठन किया गया।

दुर्घटना संभावित स्थलों पर किए गए व्यापक सुधारात्मक कार्य 

इन टीमों को स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, बॉडी वॉर्न कैमरा और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए। नवंबर 2025 से मई 2026 तक इन टीमों ने कुल 86,902 चालान किए। इनमें ओवरस्पीडिंग के 13,798, ड्रंक एंड ड्राइव के 4,109, रॉन्ग साइड ड्राइविंग के 16,682 तथा बिना हेलमेट वाहन चलाने के 14,418 मामलों सहित अन्य यातायात उल्लंघनों पर कार्रवाई की गई। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दुर्घटना संभावित स्थलों पर व्यापक सुधारात्मक कार्य भी किए गए। अवैध कटों को बंद कराया गया, डिवाइडर बनाए गए, रम्बल स्ट्रिप, रोड मार्किंग, साइनेज बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए गए।

दुर्घटनाओं में 40, मृतकों में 34 और घायलों में 55 प्रतिशत की दर्ज हुई रिकॉर्ड कमी 

इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से सड़क मरम्मत, गड्ढा भराई और अन्य इंजीनियरिंग सुधार कार्य भी कराए गए। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम नवंबर और दिसंबर 2025 में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। नवंबर 2025 में नवंबर 2024 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 27 प्रतिशत, मृतकों की संख्या में 25 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, वहीं दिसंबर 2025 में दुर्घटनाओं में 40 प्रतिशत, मृतकों में 34 प्रतिशत और घायलों में 55 प्रतिशत की रिकॉर्ड कमी दर्ज हुई।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर 5 थाने कर दिए गए परियोजना सूची से बाहर

इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर परियोजना में शामिल 9 थानों में से 5 थानों को परियोजना सूची से बाहर कर दिया गया। वर्तमान में बिसरख, बादलपुर, दादरी और दनकौर थाना क्षेत्रों में परियोजना के तहत विशेष अभियान जारी है। वर्ष 2025 के जनवरी से मई की अवधि की तुलना में वर्ष 2026 के जनवरी से मई के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 35.24 प्रतिशत, मृतकों की संख्या में 28 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 45.57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कमिश्नरेट क्षेत्र में चिन्हित 15 कंजेशन पॉइंट्स में से 7 को समाप्त कर दिया गया है, जबकि शेष स्थानों पर सुधार कार्य जारी हैं।

पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है यह मॉडल

रेड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन योजना के तहत प्रमुख मार्गों पर रूट मार्शलों की तैनाती की गई है। साथ ही अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं और अन्य आपातकालीन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की यह पहल सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना के माध्यम से जिले में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

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