पटना: बिहार की सियासत ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। कई घंटों की गहमागहमी और बैठकों के दौर के बाद, सम्राट चौधरी को औपचारिक रूप से एनडीए (NDA) विधानमंडल दल का नेता चुन लिया गया है। इस घोषणा के तुरंत बाद सम्राट चौधरी गठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं के साथ राजभवन (लोक भवन) पहुंचे और राज्यपाल सैयद अता हसनैन के समक्ष नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।
मंगलवार को पटना स्थित बिहार विधानसभा का सेंट्रल हॉल सत्ता परिवर्तन का गवाह बना। यहाँ एनडीए के घटक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भाजपा, जदयू, हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक शामिल हुए। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगाई गई और उन्हें गठबंधन का निर्विरोध नेता चुना गया। जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई, पूरा हॉल नारों से गूंज उठा। वरिष्ठ नेताओं ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्राट चौधरी का स्वागत किया।
राजभवन में सरकार बनाने का दावा पेश करने के दौरान एनडीए की एकजुटता साफ दिखाई दी। सम्राट चौधरी के साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जदयू के कद्दावर नेता ललन सिंह, विजय कुमार चौधरी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी भी मौजूद रहे। राज्यपाल को विधायकों के समर्थन की सूची सौंपने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
इससे पहले दिन की शुरुआत काफी नाटकीय रही। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद ही नई सरकार की कवायद तेज हुई थी। भाजपा विधायक दल की बैठक में जब सम्राट चौधरी को नेता चुना गया, तो वहां नीतीश कुमार भी उपस्थित थे। एक भावुक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दृश्य तब देखने को मिला जब नीतीश कुमार ने खुद सम्राट चौधरी को माला पहनाई। इसके जवाब में सम्राट चौधरी ने झुककर नीतीश कुमार के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया, जो बिहार की राजनीति में एक नई केमिस्ट्री की ओर इशारा कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनने जा रही है। कल यानी बुधवार को लोक भवन के प्रांगण में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गोपनीयता की शपथ लेंगे।
राजभवन से निकलने के बाद सम्राट चौधरी सीधे भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के निवास स्थान पर पहुंचे। वहां नितिन नवीन ने लड्डू खिलाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक आगामी मंत्रिमंडल के स्वरूप और राज्य के विकास रोडमैप को लेकर चर्चा हुई।
बिहार की राजनीति में भाजपा का नेतृत्व संभालना एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें कल होने वाले शपथ ग्रहण और उसके बाद बनने वाले नए मंत्रिमंडल पर टिकी हैं। क्या यह नई सरकार बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल पटना की सड़कों पर जश्न का माहौल है।
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