झांसी में गरीबों के आवासों पर कब्जे और किराएदारी का खुलासा, जांच के आदेश

खबर सार :-
नगर निगम प्रशासन का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई बेहद जरूरी है। यदि पात्र लाभार्थी खुद इन मकानों में नहीं रह रहे हैं तो इससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
झांसी में गरीबों के आवासों पर कब्जे और किराएदारी का खुलासा, जांच के आदेश
खबर विस्तार : -

झांसीः महानगर में गरीबों के लिए बनाई गई सरकारी आवासीय योजनाओं में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। नगर आयुक्त के निरीक्षण के दौरान कई ऐसे मकान मिले जिन पर ताले लटके हुए थे, जबकि कुछ आवासों में किराएदार रह रहे थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की है।

जानकारी के अनुसार, आईटीआई के पीछे स्थित आशा आवासीय योजना में 120 आवास बनाए गए हैं। वहीं करारी क्षेत्र में इंटीग्रेटेड हाउसिंग स्लम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 144 आवास और काशीराम शहरी आवास योजना के अंतर्गत करीब 1500 मकान बनाए गए हैं। ये सभी आवास आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को रहने के लिए उपलब्ध कराए गए थे।

सरकार की मंशा थी कि गरीब परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास मिल सके, लेकिन जांच में सामने आया कि कुछ अपात्र लोगों ने इन योजनाओं में घुसपैठ कर ली। कई लाभार्थियों ने मकानों में खुद रहने के बजाय उन पर ताले लगा दिए या उन्हें किराए पर उठा दिया।

हाल ही में नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने इन आवासीय योजनाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आशा आवासीय योजना में कई ऐसे मकान मिले जिनके ताले आवंटन के बाद से कभी खुले ही नहीं। स्थानीय लोगों से जानकारी करने पर पता चला कि कुछ आवासों में किराएदार रह रहे हैं।

इसी प्रकार करारी क्षेत्र में इंटीग्रेटेड हाउसिंग स्लम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बने मकानों में भी कई आवास खाली पाए गए, जबकि कुछ में बाहरी लोग किराए पर रह रहे थे। काशीराम शहरी आवास योजना की स्थिति भी इससे अलग नहीं मिली।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त ने जांच कमेटी का गठन किया है। इस समिति में उप जिलाधिकारी सदर द्वारा नामित नायब तहसीलदार, अपर नगर आयुक्त (पीओ डूडा), दो नामित कर्मचारी और संबंधित जोनल प्रभारी को शामिल किया गया है। समिति को सभी आवंटियों का सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई मकानों में ताले लगे मिले और कई जगह किराएदारों के रहने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त द्वारा जांच समिति गठित कर दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए। यदि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित आवंटियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण और शहरी आवास योजना जैसी कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य उन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपना घर बनाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में आवासों के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
 

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