kerala Assembly: विधानसभा के पहले दिन ‘वंदे मातरम्’ को लेकर UDF सरकार और राज्यपाल में टकराव
खबर सार :-
kerala Assembly: केरल विधानसभा के पहले दिन ‘वंदे मातरम’ को लेकर यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच तकरार हो गया। राज्यपाल कार्यालय ने पूरा गीत बजाने का निर्देश दिया था, जबकि यूडीएफ सरकार ने इसे बीच में ही रोक दिया।
खबर विस्तार : -
तिरुवनंतपुरम: केरल की नई बनी विधानसभा के पहले कामकाज वाले दिन शुक्रवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार और राज्यपाल कार्यालय (राजभवन) के बीच टकराव हो गया। यह विवाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के नीतिगत भाषण से पहले 'वंदे मातरम' गाए जाने को लेकर शुरू हुआ।
राज्यपाल के औपचारिक स्वागत के तहत केरल पुलिस बैंड ने 'वंदे मातरम' का केवल शुरुआती हिस्सा बजाया, फिर उसे अचानक रोक दिया; ऐसा तब हुआ जब गुरुवार की रिहर्सल के दौरान राजभवन ने खास निर्देश दिए थे कि राष्ट्रीय गीत पूरा बजाया जाए।
पुरानी परंपरा पर ही अड़ी UDF सरकार
हालांकि, राज्य सरकार ने इस निर्देश को मानने से इनकार कर दिया और राष्ट्रीय गीत के सिर्फ शुरुआती हिस्सा बजाने की अपनी पुरानी परंपरा पर ही अड़ी रही। नतीजतन, नई UDF सरकार और राज्यपाल कार्यालय बीच शुरूआती तनाव के संकेत दिखने लगे। राजनीतिक गलियारों में, इस घटना को सरकार और राजभवन के बीच भविष्य में होने वाले संभावित तनाव की निशानी के तौर पर देखा गया। यह धारणा इसलिए भी ज्यादा मजबूत हुई, क्योंकि यह घटना विधानसभा के पहले बड़े सत्र के दिन हुई थी, जिस दिन 139 विधायकों ने शपथ ली थी और नए स्पीकर का चुनाव हुआ।
UDF सरकार के पास बहुमत
140 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार के पास 102 विधायकों का भारी बहुमत है, जबकि वामपंथी नेतृत्व वाले विपक्ष के पास 35 सीटें हैं। पहली बार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीन विधायकों के साथ विधानसभा में दाखिल हुई है, जिससे सदन का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है।
राज्यपाल ने विवाद रोका
अंदरूनी तनाव के बावजूद राज्यपाल ने विधानसभा के भीतर इस मुद्दे को और आगे न बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मलयालम में "नमस्कारम" कहकर की और 'वंदे मातरम' विवाद या सरकार के साथ अपने मतभेदों का कोई सीधा जिक्र नहीं किया।
इस घटना से राजनीतिक संदेश साफ था। UDF सरकार यह संकेत देना चाहती थी कि वह परंपरा और प्रोटोकॉल से जुड़े मामलों में राजभवन के सामने आसानी से नहीं झुकेगी, जबकि राज्यपाल का दफ्तर भी अपने निर्देशों की इस तरह की सार्वजनिक अनदेखी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं दिखा।
सरकार और राजभवन के बीच टकराव के संकेत
दोनों पक्षों ने सार्वजनिक तौर पर संयम बरता, लेकिन अपने-अपने रुख पर मजबूती से कायम रहे। नतीजतन, 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे इस विवाद को आने वाले दिनों में सरकार और राजभवन के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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