पुष्कर में काव्य और अध्यात्म का अद्भुत संगम, डॉ. कैलाश मण्डेला को मिला राष्ट्रीय सम्मान

खबर सार :-
पुष्कर में कविता और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम देखने को मिला, जहाँ शाहपुरा के डॉ. कैलाश मंडेला को 'सुरेंद्र दुबे स्मारक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया गया। देश भर से पधारे विद्वानों, संतों और शास्त्र विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया।

पुष्कर में काव्य और अध्यात्म का अद्भुत संगम, डॉ. कैलाश मण्डेला को मिला राष्ट्रीय सम्मान
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः राजस्थान के पुष्कर में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम ने काव्य और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। विश्वविख्यात हास्यकवि सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में आयोजित 8वें सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने गायत्री मणिवेदिक शक्तिपीठ परिसर में एक ऐतिहासिक वातावरण निर्मित कर दिया। इस अवसर पर शाहपुरा (भीलवाड़ा) के प्रतिष्ठित जनकवि डॉ. कैलाश मण्डेला को “सुरेन्द्र दुबे स्मृति राष्ट्रीय सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया।

 गणमान्य संतों और अतिथियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम का आयोजन स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में चल रहे 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के अंतर्गत किया गया। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं, साहित्य प्रेमियों और विद्वानों ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। देशभर से आए संतों, शास्त्र अध्येताओं और कवियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

सम्मान समारोह के दौरान डॉ. कैलाश मण्डेला को एक लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये की सम्मान राशि, ताम्र पत्र एवं अलंकरण प्रदान किए गए। यह सम्मान चन्द्र प्रकाश दुबे सहित अन्य गणमान्य संतों और अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. मण्डेला के बहुआयामी साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला गया, जिसमें उनकी जनभावनाओं से जुड़ी कविताएं और गीत प्रमुख रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी प्रखर महाराज का भव्य स्वागत 21 किलो की माला और एक क्विंटल गुलाब पंखुड़ियों से किया गया, जिसने समारोह को भव्यता प्रदान की। मंच संचालन डॉ. कीर्ति काले द्वारा किया गया, जिनकी प्रभावशाली शैली ने पूरे कार्यक्रम को सजीव बनाए रखा। सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुए इस कवि सम्मेलन ने शुरुआत से ही आध्यात्मिक वातावरण तैयार कर दिया।

रचनाएं सुनाकर भावुक हुए श्रोता

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. कैलाश मण्डेला ने स्व. सुरेन्द्र दुबे को याद करते हुए उनकी प्रेरणादायक पंक्तियां उद्धृत कीं और आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी गुरुवंदना “असीम जिनकी चेतना” एवं “गुरु जगमग करता तारा रे” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान मंच पर फूलों और नोटों की वर्षा ने कार्यक्रम की लोकप्रियता को दर्शाया।

कवि सम्मेलन में हास्य कवि दिनेश बंटी ने “पंचायती नोहरा” प्रस्तुत कर दर्शकों को ठहाकों से भर दिया। वहीं लखनऊ से आए युवा कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत रचना “राम वही जो शबरी को सम्मान दिलाने वाले हैं” सुनाकर माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।

ब्यावर के व्यंग्यकार शिव तूफान ने “भगवान का पता” के माध्यम से तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया। दिल्ली से आईं कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने “अयोध्या में अगर ढूंढो” सहित कई मार्मिक रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं डॉ. प्रवीण शुक्ल ने “कुरुक्षेत्र युद्ध” पर आधारित अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। बिजयनगर के कवि नवीन शर्मा ने भी अपनी रचनाओं से समां बांधा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी आनंद ब्रह्मचारी महाराज ने की और इसे अत्यंत सफल बताया। इस अवसर पर शत्रुघ्न गौतम, सज्जन प्रसाद तिवाड़ी, भजन गायक नंदू महाराज, पंडित पुखराज दुबे और अशोक पारीक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह आयोजन केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि काव्य, संस्कृति और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। यहां प्रस्तुत रचनाओं ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश भी दिया।

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