अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों की कथित चढ़ावा चोरी का मामला गरमाया, शिवसेना ने पीलीभीत में सौंपा ज्ञापन, सीबीआई जांच की मांग
खबर सार :-
अयोध्या राम मंदिर में चोरी के मामले को लेकर शिवसेना ने पीलीभीत में जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 200 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता की सीबीआई जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की।
खबर विस्तार : -
पीलीभीत। अयोध्या धाम में नवनिर्मित प्रभु श्रीराम मंदिर परिसर में बड़ी वित्तीय अनियमितता और लगभग 200 करोड़ रुपये की कथित चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील और आस्था से जुड़े विषय को लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी क्रम में पीलीभीत में भी राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है, जहां शिवसेना की स्थानीय इकाई ने सीधे सरकार को घेरते हुए मोर्चा खोल दिया है।
राम मंदिर में चोरी का आरोप और कानून व्यवस्था पर सवाल
शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अनिल सिंह के विशेष दिशा-निर्देशों पर जिला अध्यक्ष शैली शर्मा के नेतृत्व में शिवसैनिकों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को संबोधित एक विस्तृत और कड़ा ज्ञापन जिला अधिकारी (डीएम) पीलीभीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस ज्ञापन में शिवसेना ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि देश के करोड़ों हिंदुओं की अटूट श्रद्धा के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या राम मंदिर में चोरी की इतनी बड़ी वारदात हो गई, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे बेहद हल्के में लिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे शैली शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा कि जहां आम नागरिकों को मात्र कुछ रुपयों या छोटी-मोटी चोरियों के आरोपों में बरसों सलाखों के पीछे गुजारने पड़ते हैं, वहीं भगवान के दरबार में हुए इतने बड़े घपले पर सरकारी तंत्र पूरी तरह सुस्त बैठा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की मौजूदा प्रशासनिक मशीनरी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि करोड़ों की हेराफेरी के बावजूद पुलिस ने महज एक साधारण प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है।
दोषियों को बचाने का संदेह और ट्रस्ट की भूमिका
शिवसेना का आरोप है कि मामले के मुख्य सूत्रधारों और पर्दे के पीछे बैठे प्रभावशाली सफेदपोश लोगों को बचाने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। यही कारण है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही संदिग्धों को मंदिर प्रबंधन से बाहर का रास्ता दिखाया गया। शैली शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, "एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर विलंब किया गया। यह ढीली कार्रवाई साफ इशारा करती है कि अयोध्या राम मंदिर में चोरी के पीछे किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है, जिसे सत्ता और रसूख का संरक्षण प्राप्त है।" इस दौरान मौके पर मौजूद जिला उपाध्यक्ष प्यारेलाल प्रजापति ने भी प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार दूसरे राज्यों में अपनी जिस कानून-व्यवस्था की पीठ थपथपाती नहीं थकती, उसी राज्य की नाक के नीचे और खुद मुख्यमंत्री के सबसे प्रतिष्ठित एजेंडे यानी अयोध्या धाम में इतनी बड़ी सेंध लग जाती है। यह घटना कानून के इकबाल पर एक गहरा धब्बा है और इसने पूरे हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है।
उच्च स्तरीय जांच और ट्रस्टियों के निलंबन की पुरजोर मांग
कानूनी बारीकियों को सामने रखते हुए शिवसेना के वरिष्ठ कानूनी सलाहकार एडवोकेट आर. के. शर्मा ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच केवल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से ही कराई जानी संभव है। स्थानीय पुलिस या प्रांतीय एजेंसियां रसूखदारों के दबाव में काम कर सकती हैं, जिससे सच कभी बाहर नहीं आ पाएगा। एडवोकेट शर्मा ने प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि जब तक केंद्रीय एजेंसी अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप नहीं देती, तब तक राम मंदिर ट्रस्ट के सभी संबंधित पदाधिकारियों, निर्णयकर्ताओं और संदिग्ध कर्मचारियों को उनके पदों से फौरन निलंबित किया जाना चाहिए। उनका पद पर बने रहना साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने और गवाहों को डराने-धमकाने का अवसर दे सकता है, जो न्याय के सिद्धांतों के पूर्णतः विपरीत है।
शिवसैनिकों का उग्र आंदोलन का संकल्प
पीलीभीत इकाई ने स्पष्ट किया है कि यदि भारत सरकार ने इस ज्ञापन का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो यह आक्रोश केवल ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगा। शिवसेना पश्चिम उत्तर प्रदेश इस मामले को लेकर जन-जन तक जाएगी और एक बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा करेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान परिसर 'जय भवानी, जय शिवाजी' और 'जय हिंदू राष्ट्र' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष शैली शर्मा, जिला उपाध्यक्ष प्यारेलाल प्रजापति, कानूनी सलाहकार एडवोकेट आर के शर्मा के साथ प्रवक्ता एडवोकेट प्रदीप श्रीवास्तव, जिला महामंत्री ऋषभ सिंह, जिला मंत्री नितिन गुप्ता, हर्षित गंगवार, करन शर्मा, राजेश मौर्य, महावीर सिंह, सौरभ यादव, अचल कुमार शर्मा, हरजीत, कुमार सेन कश्यप, सुंदरलाल गौतम और ख्याली राम कश्यप सहित भारी संख्या में शिवसैनिक और स्थानीय पदाधिकारी मुस्तैद रहे।
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