नई दिल्ली/बैंकॉक: खेल की दुनिया में भारत का डंका एक बार फिर जोर-शोर से बजा है। बैंकॉक में संपन्न हुई हुंडई वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारतीय पैरा तीरंदाजों ने अपने अचूक निशानों से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए भारतीय दल ने इस वैश्विक प्रतियोगिता में कुल 13 पदक अपने नाम किए, जिसमें 7 स्वर्ण, 3 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार उपलब्धि के साथ भारत पदक तालिका में शीर्ष पर काबिज रहा। भारत के 22 सदस्यीय दल ने रिकर्व, कंपाउंड और W1 श्रेणियों में अपनी चुनौती पेश की थी। टूर्नामेंट के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का मानसिक संतुलन और तकनीक इतनी सटीक थी कि प्रतिद्वंद्वी देशों के पास उनका कोई जवाब नहीं था।
भारतीय अभियान की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंड वर्ग में देखने को मिली। यहाँ भारतीय खिलाड़ियों ने टीम स्पर्धाओं में अपना वर्चस्व स्थापित करते हुए तीनों श्रेणियों (पुरुष, महिला और मिश्रित) में स्वर्ण पदक जीते।
रिकर्व पुरुष टीम स्पर्धा में भी भारत का तिरंगा सबसे ऊँचा रहा। विजय सुंडी और अनुभवी हरविंदर सिंह की जोड़ी ने अपनी एकाग्रता के दम पर स्वर्ण पदक जीता। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारतीयों का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा, जिससे भारत की पदक संख्या दहाई के आंकड़े को पार कर गई।
इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी उपलब्धि पायल नाग का उभरना रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार करते हुए जिस निर्भीकता के साथ प्रदर्शन किया, उसने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। वहीं, दुनिया की बेहतरीन तीरंदाजों में शुमार शीतल देवी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें क्यों 'गोल्डन गर्ल' कहा जाता है। कंपाउंड महिला व्यक्तिगत वर्ग में तो स्थिति यह थी कि फाइनल मुकाबला दो भारतीय खिलाड़ियों के बीच ही हुआ, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय पैरा तीरंदाजी की बढ़ती गहराई और प्रतिभा को दर्शाता है।
भारतीय तीरंदाजी संघ (AAI) के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा ने इस ऐतिहासिक जीत पर खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, "यह भारतीय पैरा तीरंदाजी के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। हमारे खिलाड़ियों ने न केवल पदक जीते हैं, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया है कि बाधाएं कभी भी प्रतिभा का रास्ता नहीं रोक सकतीं।" महासचिव वीरेंद्र सचदेवा ने इसे भविष्य के लिए एक शुभ संकेत बताया। उन्होंने कहा कि शीतल देवी और पायल नाग जैसे खिलाड़ी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।
बैंकॉक में भारतीय पैरा तीरंदाजों का यह प्रदर्शन केवल खेल की जीत नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों युवाओं के लिए एक संदेश है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। भारत का यह 'मिशन बैंकॉक' आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर चुका है।
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