Quiet lifestyle trend: अचानक लोग कम बोलने की आदत क्यों अपना रहे हैं?

खबर सार :-
Quiet lifestyle trend: एक रिसर्च में पाया गया है कि आज लोग पहले की मुकाबले कम बोलने की आदत को अपना रहे हैं। साल 2005 से लेकर 2019 के बीच कई अलग-अलग स्टडी में पाया गया है कि लोग कम बोलने की आदत की तरफ बढ़ रहे हैं। चलिए जानते हैं इसका कारण क्या है?

Quiet lifestyle trend: अचानक लोग कम बोलने की आदत क्यों अपना रहे हैं?
खबर विस्तार : -

Quiet lifestyle trend: आज के दौर में लोग पूरी तरह अपने काम और भागदौड़ भरी जिंदगी में सिमट कर रह गए हैं, जिससे दूसरों से बात करने का मौका ही नहीं मिल रहा है और लोग धीरे-धीरे इसको अपनी आदत बना चुके हैं। आजकल लोग दूसरों से बात करने के बजाय अपने फोन और इंटरनेट की दूनिया में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे लोगों का आपसी कम्यूनिकेशन कम होता जा रहा है। 

रिसर्च के मुताबिक

आज के इंटरनेट की दूनिया में लोग खुद को अपने कमरे और फोन तक सिमट कर रह गए हैं। इसी कारण लोग पहले की तुलना में अब कम बातें कर रहे हैं। हाल ही के एक रिसर्च के मुताबिक इस बात का खुलासा हुआ है कि साल 2005 से 2019 के बीच 22 स्टडी के मुताबिक 2200 लोगों की ऑडियो रिकॉर्डिंग में रोज बोलने वाले शब्दों की औसत संख्या में पहले के मुकाबले 28 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पहले करीब 16, 632 शब्द बोला करते थे, वहीं आज 11,900 शब्द पर आकर रुक गया है। यह आंकड़ा ज्यादातर युवाओं में पाया गया है। इसमें 25 साल के युवा रोजाना करीब 451 शब्द बोलते हैं।

इसका कारण क्या है?

जानकारों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण आज की बदलती लाइफस्टाइल है, जिसमें लोग दूसरों से बात करने को अपना टाइम वेस्ट मानते हैं और इसके जगह अपने मोबाइल में तरह-तरह के सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने अपनी जगह बना ली है। आजकल लोगों को किसी भी तरह की मदद चाहिए होता है, जैसे- खाना बनाने की रेसिपी, कहीं जाने के लिए लोकेशन की जांच और लोगों से बात करने के बजाय मैसेज के द्वारा लोगों से बात कर रहे हैं और इस कारण फेस टू फेस बात करने की आदत जैसे खत्म सी हो गई है। सामने से बात करने में जिस तरह की भाव और उतार-चढ़ाव होता है वह ऑनलाइन बात करने से पता नहीं चल पाता है। 

अच्छा बदलाव

एक्सपर्ट के मुताबिक पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा बात करना पसंद करती हैं। महिलाएं पुरुषों से हजार शब्द ज्यादा बोलती हैं। हालांकि उम्र के साथ इसमें बदलाव भी हो सकता है। इसके समाधान में एक स्टडी में बताया गया कि अगर हर रोज नए इंसान से बात करना शुरू किया जाए, तो इसमें अच्छा बदलाव लाया जा सकता है।

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