Rajpal Yadav Check Bounce Case: चेक बाउंस केस में बॉलीवुड के मशहूर एक्टर राजपाल यादव ने कोर्ट के सख़्ती के बाद गुरुवार को तिहाड़ जेल (Tihar jail) में सरेंडर कर दिया। हाल ही में, दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी, 2026 को संबंधित जेल अधीक्षक के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सरेंडर करने के बाद राजपाल एक बार फिर खुद दिल्ली हाई कोर्ट में पेश हुए और राहत मांगी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह 25 लाख रुपये का चेक लाए हैं और भरोसा दिलाया कि वह बाकी रकम भी चुका देंगे। उन्होंने इसी आधार पर राहत मांगी।
हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी राहत देने से पहले सरेंडर करना ज़रूरी है। कोर्ट ने कहा कि सरेंडर के बाद ही देखा जाएगा कि कोई राहत दी जा सकती है या नहीं। हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पहले दी गई राहत इस भरोसे पर थी कि विवाद आपसी सहमति से सुलझ जाएगा और शिकायत करने वाली कंपनी को पेमेंट कर दिया जाएगा, लेकिन कोर्ट ने पाया कि कई मौके देने के बावजूद ये वादे पूरे नहीं किए गए। कोर्ट के मुताबिक, अभी भी लगभग 9 करोड़ रुपये बकाया हैं।
दरअसल यह मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। यह फिल्म आर्थिक रूप से सफल नहीं रही। इसके बाद, लोन की रकम चुकाने में लगातार देरी हुई। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि रकम चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव और उनकी कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान, कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई नोटिस भेजे, लेकिन वह लंबे समय तक कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिसके बाद 2013 में उन्हें 10 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया। वह 3 दिसंबर से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में रहे। बाद में, दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने अपील पर उनकी सज़ा निलंबित कर दी।
इसके बाद, निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने अस्थायी रूप से सज़ा निलंबित कर दी, यह कहते हुए कि एक्टर आदतन अपराधी नहीं है और उनके मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसी आधार पर, कोर्ट ने दोनों पक्षों को कोर्ट के बाहर सेटलमेंट की संभावना तलाशने की सलाह दी और केस को मीडिएशन सेंटर भेज दिया।
मीडिएशन के दौरान, राजपाल यादव (Rajpal Yadav) ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह शिकायत करने वाली कंपनी को कुल 2.5 करोड़ देंगे। इसमें 40 लाख की पहली किस्त और 2.10 करोड़ की दूसरी किस्त शामिल थी। जनवरी 2026 में कोर्ट ने राजपाल यादव को आखिरी मौका दिया, लेकिन फिर भी पेमेंट नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी एक भी किस्त का भुगतान नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि गलती के बारे में पता होने के बावजूद, न तो पेमेंट किया गया और न ही कोई औपचारिक स्पष्टीकरण दिया गया।