समग्र आरोग्य का मार्ग- योग

योग के आरोग्य लाभ व्यापक हैं एवं आधुनिक जीवन शैली की चुनौतियां -जैसे व्यस्त एवं तनावपूर्ण दिनचर्या औरअसंतुलित खानपान और अनियमित जीवन शैली के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं के नियंत्रण में सहायक है। योग शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक मजबूती, भावनात्मक संतुलन एवं आध्यात्मिक शांति के लिए “समग्र समाधान ” प्रदान करता है।
समग्र आरोग्य का मार्ग- योग

 प्राचीन भारत के ऋषियों, मननशील चिंतकों एवं तपस्वियों के पावन आश्रमों में योग को आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में विकसित किया गया था । आधुनिक समय में योग वैश्विक जन -आंदोलन का रूप धारण कर चला है, जो विश्व के करोड़ों लोगों को अपनी मौलिक उपादेयता से आकर्षित कर रहा है। वैश्विक स्तर पर लोग शारीरिक स्वास्थ्य सुधार, तनाव में कमी ,भावनात्मक स्वास्थ्यसामर्थ्य, सकारात्मक चिंतन और रोग - नियंत्रण के लिए दैनिक जीवन में योग को समाहित कर रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि योग शरीर मेंविषाक्त तत्वों के प्रभाव को कम करता है एवं प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है । योग अनुशासन के परिणाम स्वरुप व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ एवं सक्रिय रहता है। योग को दैनिक दिनचर्या में सम्मिलित करने से तनावजनितहार्मोन कोर्टिसोल का प्रभाव कम होने लगता है । योग समग्र आरोग्य के लिए “एक मार्ग” प्रदान कर रहा है।

योग के लाभ

योग वैश्विक स्तर पर व्यक्तियों की शारीरिक ,मानसिक एवं आत्मिक आवश्यकताओं के अनुकूल “एक समग्र शिक्षा प्रणाली है” जो शारीरिक लचीलापन , सामर्थ्य एवं संतुलन के विकास में सक्षम है । वैज्ञानिक अध्ययनों से पुष्टि होती है कि, योगासन शरीर के प्रमुख तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करते हैं एवं तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर “विश्राम “ को बढ़ावा देते हैं। योग एवं ध्यान द्वारा मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है; तनाव, चिंता एवं अवसाद के लक्षणों में कमी आती है। एकाग्रता एवं संज्ञानात्मक कार्यवृद्धि में वृद्धि होती है। योग आंतरिक शांति , स्व -प्राप्ति एवं मानसिक लचीलापन को उत्पन्न करता है। योग की वैश्विक महत्ता ने देश -दर - देश संस्कृतियों के बीच की खाई को पाट रहा है। यह स्वास्थ्य एवं शांति के लिए “संजीवनी” के समान कार्य करता है ,जो रोग प्रतिरोधक क्षमता ,हृदय श्वास प्रणाली औरचयापचय नियमन में मेटाबॉलिक सुधार दर्शाता है।

योग शारीरिक आसनों,ध्यान तथा साधना का “समग्र विज्ञान” है जो शरीर, मन एवं आत्मा के बीच “साम्य ” स्थापित करने का उपक्रम है । यह शारीरिक बल एवं लचीलापन प्रदान करता है ,बल्कि मानसिक अनुशासन ,भावनात्मक संतुलन एवं अंतरात्मा - चेतना को भी सक्रिय करता है । योग विज्ञान मानव के आंतरिक तथावाह्य दोनों को समुचित रूप से संलग्न कर संपूर्ण स्वास्थ्य एवं कल्याण की दिशा में कार्य करता है । वैश्विक परिप्रेक्ष्य में योग नेअनेक देशों में अनुशासन एवं उपचारात्मक प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त की है। नैदानिक अध्ययनों एवं प्रमाणित अनुसंधानों में योग के शारीरिक लाभ -जैसे मांसपेशियों की मजबूती, गतिशीलता ,एवं श्वसन प्रक्रिया में मजबूती होती है।

शारीरिक रूप से योग लचीलेपन, शक्ति एवं सामान्य शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है । स्ट्रेचिंग एवं योगाभ्यास से मांसपेशियों की लोच और ताकत में सुधार होता है। हड्डियों एवं जोड़ों का समर्थन मजबूत होता है। नियमित अभ्यास से प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और शरीर कीस्व - रक्षण प्रक्रियाएं बेहतर होती है। योग का प्रभाव कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली पर भी सकारात्मक होता है। नियंत्रित श्वसन, ध्यान और कुछ आसन हृदय कीकार्यक्षमता एवं रक्त परिसंचरण तंत्र में सुधार करने में सहयोग करते हैं। इसके परिणाम स्वरुप शारीरिक ऊर्जा स्तर एवं रक्त परिसंचरण तंत्र में “बेहतर सुधार महसूस किया जाता है।”

मानसिक एवं भावनात्मकस्तर पर योगतनावप्रबंधन के लिए प्रभावी है। ध्यान, प्रत्याहार एवं स्वास्थ्य की तकनीक से तनाव घटता है,मनकी एकाग्रता बढ़ती है एवं भावनात्मक संतुलन आता है। योग मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल एवं अन्य चयापचय संबंधित जोखिमों के प्रबंधन में सहायक पाया गया है - विशेषकर जब इसे संतुलित आहार एवं सुधार के साथ मिलकर अपनाया जाए। योग से शारीरिक विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में सहयोग मिलती है - बेहतर परिसंचरण एवं पाचन के जरिए शरीर से अवशिष्ट पदार्थबाहर निकलते हैं - जिससे ऊर्जास्तर एवं कल्याण में सुधार होता है। कुल मिलाकर ,योग से शरीर एवं मन दोनों में सुधार एवं दीर्घकालिकस्वास्थ्य लाभ मिलता है।

दुनिया में हो रहा प्रचार-प्रसार

 योग दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका है। यह बीमारियों के नियंत्रण में सहयोग करता है एवं हर कार्य में “सकारात्मक दृष्टिकोण” भीबढ़ाता है । आधुनिक युग में स्वामी विवेकानंद जी ने 1893 में “शिकागो धर्म संसद” के माध्यम से पश्चिमी दुनिया को भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया। उन्होंने योग के विचारों को वैश्विक मंचों पर उजागर किया। बाद में 1896 में प्रकाशित उनकी रचना राजयोग नेव्याख्यान सेयोग की महत्ता और प्रासंगिकता को बौद्धिक दृष्टि से समझने में सहायकरहीं।

वर्तमान समय में योग एक जन -आंदोलन के रूप में विश्व व्यापी रूप से प्रसार कर रहा है। करोड़ों लोग इसके अभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं एवं शांति का अनुभव कर रहे हैं। सामयिक परिदृश्य में स्वामी रामदेव जी ने योग को दैनिक जीवन का अनिवार्य अंग बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। योग शारीरिक स्वास्थ्य एवं आत्म -नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण अंग है। 

योगाभ्यास से मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव होने के प्रत्यक्षएवं अप्रत्यक्षप्रमाण चिकित्सा जर्नल में मिलता है । नियमित योग से स्मृति, ज्ञान एवं संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार होने, अवसाद एवं चिंता के लक्षणों में कमी आने एवं तनाव - प्रतिक्रिया में परिवर्तन देखने की वैज्ञानिक प्रतिवेदन उपलब्ध है। कई अध्ययनों ने यह संकेत दिया है कि ,श्वास आधारित तकनीके हैं -जैसे अनुलोम -विलोम एवं भ्रामरी- मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और स्वचालित उत्तेजना में सहायक हो सकती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए योग को आवश्यक मानता है तथा योग के वैश्विक प्रसार को भारतीय जीवन शैली के लिए “स्वास्थ्यवर्धक औषधि “माना जाता है। संघ कामानना है कि योग से शरीर एवं मन पर गुणात्मक प्रभाव पड़ता है। बढ़ती उम्र , अव्यवस्थित जीवनशैली ,तनाव व मानसिक दबाव के कारण बच्चों ,युवाओं, वयस्कों और वृद्ध व्यक्तियों में तनावजनित एवं उम्र संबंधित रोग उत्पन्न हो रहे हैं । स्वास्थ्य की स्थिरता एवं गुणवत्ता बनाए रखने में योग की महत्वपूर्ण उपयोगिता है।

प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह नेगी 
डूटा प्रेसिडेंट।

 

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