Suryakumar Yadav T20 World Cup : नागपुर में जैसे ही भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav ) मैदान पर उतरेंगे, वह अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में अपने 100 मैच पूरे कर लेंगे। यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी है, लेकिन सूर्यकुमार के लिए यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके पूरे करियर की दिशा तय करने वाला पड़ाव बनती जा रही है। वह पूर्ण सदस्य देशों के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने बिना लंबे टेस्ट या वनडे करियर के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतनी लंबी यात्रा तय की है। दरअसल, सूर्यकुमार इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने न तो 10 टेस्ट खेले और न ही 40 वनडे, फिर भी वह इस फॉर्मेट में सालों से भारत की रीढ़ बने हुए हैं। यह तथ्य अपने आप में बदलते क्रिकेट परिदृश्य की कहानी कहता है।

Suryakumar Yadav T20 World Cup : सूर्यकुमार भारत के सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले क्रिकेटर
35 वर्ष की उम्र में भी सूर्यकुमार जब भी मौका मिलता है, मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट खेलते नजर आते हैं। उनके करियर की शुरुआत ऐसे दौर में हुई थी, जब ‘टी20 विशेषज्ञ’ जैसी कोई अवधारणा नहीं थी। तब क्रिकेटर का सपना टेस्ट और वनडे के जरिए पहचान बनाना होता था। लेकिन समय के साथ खेल बदला और सूर्यकुमार अनजाने में उसी बदलाव का चेहरा बन गए। 2023 वनडे विश्व कप फाइनल के बाद भारत ने जहां बेहद कम वनडे खेले, वहीं टी20 मैचों की संख्या तेजी से बढ़ी। इस दौर में सिर्फ एक फॉर्मेट खेलने के बावजूद सूर्यकुमार भारत के सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ियों में शुमार रहे। यह दिखाता है कि आधुनिक क्रिकेट में टी20 अब सिर्फ छोटा प्रारूप नहीं, बल्कि एक अलग खेल बन चुका है।

आज भारतीय टी20 टीम की तस्वीर देखें तो साफ दिखता है कि ज्यादातर बल्लेबाज केवल इसी फॉर्मेट में सक्रिय हैं। संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह और खुद सूर्यकुमार-ये सभी टी20 विशेषज्ञ माने जाते हैं। हालांकि इस विशेषज्ञता के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं, खासकर भारतीय खिलाड़ियों के लिए, जिन्हें आईपीएल के अलावा किसी विदेशी लीग में खेलने का मौका नहीं मिलता। कभी सूर्यकुमार की तुलना एबी डी विलियर्स जैसे महान बल्लेबाज से होती थी। लेकिन बीते एक साल में उनके बल्ले से एक भी अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक नहीं निकला है। विरोधी टीमें अब उनके खिलाफ बेहतर योजनाओं के साथ उतर रही हैं और सूर्यकुमार बार-बार उन गेंदों पर आउट हो रहे हैं, जिन्हें वह पहले आसानी से बाउंड्री के पार पहुंचा देते थे।

रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज जब टी20 विश्व कप खेलते थे, तो उनका लक्ष्य ट्रॉफी जीतना जरूर होता था, लेकिन उनकी व्यक्तिगत विरासत पहले ही सुरक्षित थी। सूर्यकुमार के साथ ऐसा नहीं है। कप्तान के रूप में यह विश्व कप उनके पूरे करियर का मूल्यांकन कर सकता है। भले ही वह 2024 के विश्व कप विजेता दल का हिस्सा रहे हों और फाइनल में डेविड मिलर का निर्णायक कैच उनके नाम हो, लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए वह सुनहरी याद अब फीकी पड़ती जा रही है। आने वाले दो महीने उनके लिए मानसिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर सबसे कठिन हो सकते हैं।

खुद सूर्यकुमार मान चुके हैं कि उन्हें अपनी गलतियों का अंदाजा है और वह सुधार की कोशिश कर रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कहीं कोई हल्की चोट उनकी टाइमिंग और ताकत को प्रभावित तो नहीं कर रही। लेकिन कप्तान होने के नाते वह खुद को आराम देने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह लगभग तय माना जा रहा है कि सूर्यकुमार 2028 टी20 विश्व कप तक शायद क्रिकेट न खेलें। ऐसे में अगर इस बार भारत खिताब नहीं जीत पाया, तो उनका करियर आईपीएल की चमकदार सफलताओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय टी20 में किसी बड़ी ट्रॉफी के बिना समाप्त हो सकता है। इसीलिए यह विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि सूर्यकुमार यादव की पहचान, कप्तानी और विरासत का अंतिम इम्तिहान बन चुका है।
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