भोपालः मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू कर दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने निष्पक्ष जांच और मीडिया ट्रायल को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि मामले की जांच कानून और प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए और किसी भी पक्ष को मीडिया के जरिए सनसनी फैलाने से बचना चाहिए।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.एम. पंचोली की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखकर अदालत को “तकलीफ” हुई है। उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार या आरोपी पक्ष के बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न किया जाए और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए।
सीजेआई ने कहा कि ट्विशा की सास एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायपालिका पर निष्पक्ष सुनवाई न होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत को जांच एजेंसियों और कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और सच सामने लाएंगे।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मृतका की सास विभिन्न टीवी चैनलों पर जाकर बयान दे रही हैं और मृतका की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं। वहीं आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि मामले से जुड़े 161 के बयान अगले ही दिन अखबारों में प्रकाशित हो गए थे।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास कोई तथ्य या बयान है तो उसे जांच एजेंसी के सामने रखा जाना चाहिए, न कि कैमरों के सामने। अदालत ने यह भी कहा कि मीडिया को केवल तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करनी चाहिए और किसी तरह का मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी भेदभाव के जांच होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि किसी भी तरह के सनसनीखेज बयान जांच को प्रभावित कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि मीडिया कवरेज की वजह से ही मामला उसके संज्ञान में आया, लेकिन अब सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।
पीड़ित परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी की और सबूत सुरक्षित रखने में भी लापरवाही बरती। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्विशा की सास खुद अपनी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सार्वजनिक कर रही हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएगी ताकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जल्द से जल्द जांच अपने हाथ में ले सके। अदालत ने अपने आदेश में इस भरोसे का उल्लेख भी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर सच सामने लाएंगी।
गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित उनके ससुराल में फांसी के फंदे पर लटका मिला था। इसके बाद कटारा हिल्स पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया गया। यह पोस्टमार्टम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम ने किया। परिवार लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
अब पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने वाली जांच पर टिकी हुई है। अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और इस हाई-प्रोफाइल मामले का सच जल्द सामने आएगा।
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