नई दिल्ली:देश के सबसे चर्चित और लोकप्रिय कोचिंग संचालक खान सर (Khan Sir) और टीवी मीडिया के एक नामचीन पत्रकार के बीच छिड़ी कानूनी जंग ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर कोचिंग अध्यापकों के खिलाफ देश की राजधानी की अदालत में लगाई गई गुहार पहली ही सुनवाई में बेअसर साबित हुई है। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) की वेकेशन बेंच ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से बदनाम करने के मामले में टीवी पत्रकार को किसी भी तरह की तुरंत राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब इस पूरे विवाद को लेकर सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा (Justice Neena Bansal Krishna) की अवकाशकालीन पीठ ने इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई की। अदालत ने पत्रकार की तरफ से तुरंत अंतरिम राहत दिए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया, बल्कि इसके उलट खान सर समेत मामले से जुड़े अन्य सभी कोचिंग संचालकों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने साफ किया है कि बिना दूसरे पक्ष की बात सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जाएगा। कानून की इस चौखट पर अब अगली भिड़ंत आगामी 17 जून को होने वाली है, जिस पर पूरे देश के छात्रों और दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
दरअसल, इस पूरे फसाद की शुरुआत तब हुई जब शिकायतकर्ता टीवी पत्रकार ने अपने समाचार चैनल पर 'स्टार टीचर्स' (Star Teachers) नाम से एक विशेष कार्यक्रम का प्रसारण किया था। आरोप है कि इस शो के दौरान उन्होंने देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों और कोचिंग संचालकों के लिए बेहद आपत्तिजनक और मर्यादित सीमाओं को पार करते हुए 'दो कौड़ी का टीचर' जैसे तीखे शब्दों का प्रयोग किया था। इस प्रसारण के बाद शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर एक जबरदस्त आक्रोश फैल गया। खान सर और उनके जैसे कई अन्य लोकप्रिय शिक्षकों ने पत्रकार के इस रवैए को सीधे तौर पर गुरु परंपरा का अपमान माना और डिजिटल माध्यमों पर वीडियो जारी कर इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
पत्रकार द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका में यह दावा किया गया है कि कोचिंग संचालकों ने अपने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी छवि को पूरी तरह से धूमिल करने की कोशिश की है। याचिका के अनुसार, इन वीडियो में पत्रकार के लिए 'बिकाऊ पत्रकार', 'चाटुकार' और 'दलाल' जैसे बेहद अपमानजनक और गंभीर लांछन लगाने वाले शब्दों का इस्तेमाल सरेआम किया गया। इतना ही नहीं, उन पर पैसों के लिए दलाली करने और 'फेक न्यूज की दुकान' (Fake News) चलाने के गंभीर आरोप भी मढ़े गए। पत्रकार का कहना है कि इन टिप्पणियों के बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ एकतरफा माहौल बन गया है, जिसके कारण न सिर्फ उनकी छवि खराब हुई है बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक उत्पीड़न और सुरक्षा के बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
इस टकराव ने तब और बड़ा रूप ले लिया जब संबंधित पत्रकार और उनके पूरे मीडिया संगठन ने सामूहिक रूप से इस मामले को अदालत में घसीटने का फैसला किया। खान सर और अन्य शिक्षकों के खिलाफ दायर इस दीवानी मानहानि याचिका में पत्रकार ने अपनी प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के बदले दो करोड़ रुपये (Two Crore Rupees) के भारी-भरकम हर्जाने की मांग की है। हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहली सुनवाई में पत्रकार की फौरी राहत वाली उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब देखना यह होगा कि 17 जून को होने वाली अगली कानूनी जिरह में खान सर और अन्य कोचिंग शिक्षक अदालत के सामने अपना क्या बचाव पक्ष रखते हैं और यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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