नई दिल्लीः देशभर में आयोजित नीट यूजी परीक्षा 2026 को पेपर लीक और कथित धांधली के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी है। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी निराशा और चिंता का माहौल देखने को मिल रहा है, विशेषकर उन छात्रों में जिन्होंने लंबे समय तक कठिन तैयारी की थी।
कोटा में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने बातचीत में कहा कि इस फैसले से उनका मनोबल बुरी तरह प्रभावित हुआ है। छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और मानसिक तैयारी पर अचानक पानी फिर गया है।
अरुण चतुर्वेदी ने बीकानेर में इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कोटा में तैयारी कर रही छात्रा जिया ने कहा कि उसने पिछले दो वर्षों से दिन-रात मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी। पेपर लीक की खबर और परीक्षा रद्द होने से उसकी सारी मेहनत बेकार होती महसूस हो रही है। उसने कहा कि इतनी कम अवधि में फिर से परीक्षा देना मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होगा और इस बार शायद पहले जैसा प्रदर्शन करना आसान नहीं रहेगा।
छात्र मोहम्मद अहरान ने कहा कि पेपर लीक कराने वालों को शायद कोई फर्क न पड़े, लेकिन इसका असर 20 से 22 लाख छात्रों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि दोबारा परीक्षा देने का दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालेगा।
एक अन्य छात्र ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा को लेकर विवाद हुआ हो। उसने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं। छात्र का कहना था कि इस बार प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान था और कई छात्रों को अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की उम्मीद थी, लेकिन अब उनका सपना टूटता नजर आ रहा है। उसने कहा कि इस घटना के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर भरोसा कम हुआ है।
कोटा की ही एक छात्रा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी के दौरान एक विशेष लय और आत्मविश्वास बनता है, जिसे दोबारा हासिल करना आसान नहीं होता। लगातार टेस्ट, अभ्यास और पढ़ाई के बाद मानसिक रूप से जो स्थिति बनती है, परीक्षा रद्द होने से वह पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
धौलपुर और सीकर में भी छात्रों ने परीक्षा रद्द होने पर निराशा व्यक्त की। छात्र ऋषभ ने कहा कि यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका है। वहीं छात्रा खुशी तोमर ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा कि बच्चों को दोबारा हिम्मत देना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया था, उनके लिए यह फैसला बहुत पीड़ादायक है। अब इतनी जल्दी दोबारा परीक्षा की तैयारी करना बच्चों के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कठिन साबित होगा।
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