Bihar Temple Stampede: नालंदा में शीतला अष्टमी पर भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल

खबर सार :-
मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा में स्थित मगहरा मेले में एक बड़ी त्रासदी घटित हुई, जहाँ प्रसिद्ध माता शीतला मंदिर में अचानक मची भगदड़ में आठ लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि मृतकों में ज़्यादातर महिलाएँ थीं।

Bihar Temple Stampede: नालंदा में शीतला अष्टमी पर भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल
खबर विस्तार : -

पटना:  बिहार के नालंदा जिला से मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई, जहां शीतला अष्टमी के अवसर पर आयोजित धार्मिक मेले के दौरान मंदिर परिसर में भगदड़ मच गई। इस हादसे में कम से कम 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है।

अचानक मची अफरा-तफरी

यह घटना मघड़ा गांव स्थित माता शीतला मंदिर में हुई, जो बिहारशरीफ से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। शीतला अष्टमी के अवसर पर यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए जुटते हैं। इस वर्ष भी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जो अंतिम मंगलवार के साथ संयोग में थी, के कारण असाधारण भीड़ उमड़ी थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई थी। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई, व्यवस्था बिगड़ती चली गई। इसी दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ शुरू हो गई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे कई लोग कुचल गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतकों में अधिकतर महिलाएं बताई जा रही हैं। अब तक जिनकी पहचान हुई है, उनमें सकुन्त बिहार निवासी दिनेश रजक की 50 वर्षीय पत्नी रीता देवी और नूरसराय के मथुरापुर निवासी कमलेश प्रसाद की 45 वर्षीय पत्नी रेखा देवी शामिल हैं। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। घायलों को तत्काल पास के मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सूचना मिलते ही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल की तैनाती कर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शीतला अष्टमी जैसे बड़े पर्व पर भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। न तो पर्याप्त पुलिस बल तैनात था और न ही बैरिकेडिंग या प्रवेश-निकास के उचित प्रबंध किए गए थे। लोगों का यह भी कहना है कि मंदिर में कोई सुव्यवस्थित लाइन व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण श्रद्धालु एक साथ अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे और यही भगदड़ का मुख्य कारण बना।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हर मंगलवार को इस मंदिर में भीड़ लगती है, लेकिन शीतला अष्टमी के दिन यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया, जिसका खामियाजा श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा।

सीएम व डिप्टी सीएम ने व्यक्त किया शोक

इस घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, घायलों के समुचित इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं।

धार्मिक दृष्टि से शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु माता शीतला की पूजा करते हैं और परंपरा के अनुसार घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। एक दिन पहले तैयार किए गए ठंडे भोजन को माता को भोग लगाया जाता है। इस परंपरा के कारण बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दौरा

इसी बीच, राज्य में एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 मार्च को बिहार दौरे पर हैं, जहां वह नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम राजगीर में आयोजित किया जा रहा है, जहां देश-विदेश से छात्र और शिक्षाविद पहुंच रहे हैं।

नालंदा की इस घटना ने एक बार फिर बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में पूर्व योजना, पर्याप्त सुरक्षा बल, स्पष्ट मार्ग व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली बेहद आवश्यक है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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