Indian Economy को मिला नया बूस्ट! 2026 में 7% GDP Growth का अनुमान, सस्ता कच्चा तेल बनेगा बड़ी ताकत

खबर सार :-

बोफा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक संकेत देती है। मजबूत जीडीपी वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट और वैश्विक महंगाई में कमी भारत के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है। हालांकि, अमेरिका की मौद्रिक नीति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति भविष्य की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Indian Economy को मिला नया बूस्ट! 2026 में 7% GDP Growth का अनुमान, सस्ता कच्चा तेल बनेगा बड़ी ताकत

खबर विस्तार : -

India GDP growth 2026:  भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में मजबूत रफ्तार बनाए रख सकती है। बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अप्रैल में जारी 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से काफी बेहतर है। रिपोर्ट में 2027 के लिए भी भारत की विकास दर 7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जो देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है।

2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का भी लाभ मिल सकता है। अनुमान है कि 2026 की दूसरी छमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल रहेगी, जबकि 2027 में यह घटकर 65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह अनुमान पश्चिम एशिया में शांति और भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगा। यदि क्षेत्र में तनाव नहीं बढ़ता है, तो ऊर्जा लागत में कमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत लेकर आएगी।

आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में बढ़ोतरी

बोफा सिक्योरिटीज ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अपना आउटलुक बेहतर किया है। रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 3.2 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह अप्रैल में जारी अनुमान से 10 आधार अंक अधिक है। साथ ही, वैश्विक महंगाई दर में भी लगातार कमी आने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक महंगाई 3 प्रतिशत, 2027 में 2.4 प्रतिशत और 2028 में 2.5 प्रतिशत रह सकती है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की भी ओर इशारा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में सख्त वित्तीय परिस्थितियां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर 2026 से ब्याज दरों में कुल 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे वैश्विक पूंजी प्रवाह और निवेश पर असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और 2026 की पहली तिमाही के बेहतर जीडीपी आंकड़ों ने उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है। चीन को छोड़कर उभरते एशियाई देशों की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 5.9 प्रतिशत और 2027 में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

कच्चे तेल की कीमतें और लिक्विडिटी का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई कारक गति दे रहे हैं। इनमें अमेरिकी नीतियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से विस्तार, चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, राजकोषीय असंतुलन और वैश्विक स्तर पर बढ़ी हुई तरलता (लिक्विडिटी) प्रमुख हैं। ये सभी कारक मिलकर वैश्विक विकास को नई दिशा दे सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस वर्ष की शुरुआत में अपने उच्चतम स्तर से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 42 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और यह लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बाद समुद्री व्यापार में भी तेजी देखने को मिली है। 24 जून को इस मार्ग से 78 जहाजों के गुजरने का नया दैनिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जो युद्ध-पूर्व स्तर के 57 प्रतिशत के बराबर है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार का संकेत देता है।

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