US-Israel-Iran War: ईरान-इजरायल-US के बीच जारी जंग और तेज हो गई है। युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटों का अल्टीमेटम दिया है। शनिवार को अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट को तबाह कर देगा।
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान 48 घंटे के भीतर बिना किसी खतरे के होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उनके अलग-अलग पावर प्लांट पर हमला कर उसे नेस्तनाबूद कर देगा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस हमले की शुरुआत "सबसे बड़े पावर प्लांट" से की जाएगी।
इससे पहले, ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगियों और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से इस अहम समुद्री रास्ते की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने का आग्रह किया था। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "हम होर्मुज़ जलडमरूमध्य का इस्तेमाल नहीं करते; अमेरिका को इसकी ज़रूरत नहीं है। यूरोप, कोरिया, जापान और चीन को इसकी ज़रूरत है, इसलिए उन्हें इसमें शामिल होना होगा। हालांकि NATO ने अभी तक कार्रवाई करने का साहस नहीं दिखाया है।
बता दें कि अमेरिका पर इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इसमें किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसी वजह से अमेरिका ने ईरान को एक कड़ी चेतावनी जारी की है और इसके लिए एक सख्त समय सीमा तय कर दी है।
जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को ठप करने की एक सोची-समझी रणनीति है। दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई का एक प्रमुख केंद्र है। ईरान द्वारा इस पर नाकेबंदी किए जाने से वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन पर देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दबाव पड़ रहा है।
इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा।ईरान की 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल कमांड' के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ुल्फ़ागरी ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के डिसैलिनेशन प्लांट्स (पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) और IT इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला करेगा।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को US-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अधिकांश शिपिंग यातायात के लिए बंद कर दिया है। विशेष रूप से उन देशों के जहाजों के लिए जो ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस नाकेबंदी के कारण तेल पर निर्भर देश वैकल्पिक मार्ग खोजने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं और अपने रणनीतिक भंडारों का उपयोग कर रहे हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है, खासकर अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है।
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