Iran-US tensions : तेहरान में हाल ही में एक कथित चिट्ठी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को मिली ईरानी चिट्ठी में वॉशिंगटन के लिए संदेश था। यह चिट्ठी उनकी अमेरिका यात्रा से ठीक पहले भेजी गई थी, जिसके बाद मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा बढ़ गई कि ईरान ने सऊदी अरब को “मध्यस्थ” बनाकर अमेरिका से अप्रत्यक्ष संपर्क साधा है। हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने इन दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी मीडिया और कुछ देश झूठी अफवाहें फैला रहे हैं कि ईरान किसी तीसरे देश के जरिए अमेरिका को संदेश भेज रहा है। ऐसी बातों का हकीकत से कुछ भी लेना-देना नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस को चिट्ठी भेजी थी, जिसमें लिखा गया था कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है और टकराव से बचना चाहता है। साथ ही यह भी कहा गया था कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है—बशर्ते उसके अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी हो। मीडिया के एक वर्ग ने इसी चिट्ठी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए “संदेश” के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे खामेनेई ने भ्रामक और षड्यंत्रपूर्ण बताया। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चिट्ठी पूरी तरह सऊदी-अमेरिका संबंधों से अलग थी और उसमें केवल तेहरान-रियाद के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
अपने संबोधन में खामेनेई ने अमेरिका पर इजरायल का “खुला समर्थन” करने का आरोप लगाया और कहा कि वॉशिंगटन अपने सामरिक फायदे के लिए विवादों को हवा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में अस्थिरता फैलाकर अपनी ताकत को कायम रखना चाहता है। खामेनेई ने इजरायली हमलों को “अपराध” बताया और कहा कि अमेरिका इन हमलों को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा दे रहा है।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच इस साल अप्रैल से जून तक ओमान की मध्यस्थता में पांच दौर की वार्ता हुई थी। छठे दौर की उम्मीद की जा रही थी, तभी इजरायल ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर अचानक हमले कर दिए, जिनमें ईरान के सीनियर कमांडर और न्यूक्लियर वैज्ञानिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। 22 जून को अमेरिकी सेना ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। अगले ही दिन ईरान ने कतर में अमेरिकी अल उदीद एयर बेस पर जवाबी हमला किया। बढ़ते तनाव के बीच 24 जून से ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर लागू हुआ।
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