मध्य प्रदेश के धार जिले में वराह मार्च पर प्रशासन सख्त, 1000 पुलिसकर्मी तैनात, 7 गिरफ्तार
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के धार जिले में वराह मार्च पर प्रशासन ने रोक लगा रखी है। बंदिश के चलते 1000 पुलिसकर्मी पहले से ही तैनात कर दिए गए हैं। सोमवार तक 7 गिरफ्तारियां हो चुकी थी। वहीं रैली की जिद पर सनातन प्रहरी अड़ा हुआ है।
खबर विस्तार : -
धार, मध्य प्रदेश के धार जिले में मंगलवार को वराह मार्च प्रस्तावित है। इसको लेकर प्रशासन ने शहर में सुरक्षा का चक्रव्यूह तैयार किया है। मजबूत कानून व्यवस्था की झलक दिखाने के लिए 800 से 1000 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। इस प्रस्तावित आयोजन पर प्रशासन ने रोक लगा रखी है। शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है।
दोनों समुदाय जता रहे हैं अपना हक
जानकारी के अनुसार, वराह रैली की अनुमति निरस्त कर दिए जाने के बाद से मामला और गंभीर होता जा रहा है। एक ओर सनातन प्रहरी समिति अपने तय कार्यक्रम पर अड़ी हुई है तो दूसरी ओर प्रशासन ने पक्की बंदिश लगा रखी है। करीब 800 से 1000 पुलिसकर्मियों की तैनाती उसी प्रस्तावित रैली क्षेत्र में की गई है। यहां तक रैली या मार्च से जुड़ा व्यक्ति पहुंचने से पहले ही रोक लिया जाएगा।
तीन स्तर की बैरिकेडिंग और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। आयोजन से जुड़े 7 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। क्षेत्र में धारा 144 लागू है। दरअसल, धार में लाट मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस स्थल को हिंदू समाज के लोग विजय मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समाज इसे लाट मस्जिद मानता है। इसी तरह यहां आयोजन भी बदले हुए हैं। मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा करते हैं, जबकि हिंदू समाज दशहरा पर्व के दौरान मिलन समारोह आयोजित करता है।
ऐतिहासिक इमारत को लेकर टकराव
इस स्थान पर अपना हक जताने के लिए सनातन प्रहरी समिति 15 सितंबर मंगलवार को बाइक रैली ‘वराह मार्च’ निकालने का ऐलान किया है। आयोजन दोपहर 2 बजे पीजी कॉलेज से शुरू होगा। इसके साथ ही यह लोग विजय कीर्ति मंदिर तक बाइक रैली के साथ जाएंगे। हिंदूवादी संगठनों ने दावा किया है कि जिसे लाट मस्जिद कहा जाता है, वह परमार काल का विजय मंदिर है। सनातन प्रहरी समिति 15 सितंबर को यही साबित करने के लिए मार्च का आयोजन कर रहा है। इस नए विवाद को गंभीर मानते हुए एवं इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसे सोमवार को भी बंद कर रखा है।
बड़ी इमारतों पर भी जवान तैनात
इधर, मामला कहीं बड़ा न हो जाए, इसलिए प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर वराह मार्च को निरस्त कर दिया है। शहर में किसी प्रकार का उपद्रव न हो, इसके लिए महत्वपूर्ण धाराएं 144 से संबंधित लागू कर दी गई हैं। प्रशासन ने आज संरक्षित इमारत को बंद रखने का निर्णय लिया है। यहां किसी भी समुदाय के आयोजन पर पाबंदी रहेगी।
इधर, समिति के पदाधिकारियों ने अब तक अपने पूर्व के घोषित कार्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। आने वाले दिन त्योहारों के हैं, ऐसी स्थिति में पुलिस-प्रशासन धार में अशांति के लिए किसी प्रकार का मौेका नहीं छोड़ रहा है। कल के आयोजन से पहले आज ही शहर में करीब 800 से 1000 पुलिसकर्मियों को संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल शहर में स्थिति सामान्य है।
हालात से निपटने के इंतजाम पूरे
पुलिस-प्रशासन की ओर से कहा गया है कि शहर में कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए धार शहर में किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है। दूसरी ओर मुस्लिम समाज ने भी वाहन रैली निकालने के लिए प्रशासन को आवेदन दिया गया था। यह रैली भी अनुमति विहीन है।
दोनों समुदायों की मांग पर विवाद टकराव की ओर बढ़ रहा है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती पुलिस को मिली है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने बताया कि वराह मार्च के लिए बाइक रैली का आह्वान किया गया था। प्रशासन से कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिली। कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। शहर में पुलिस की टीमें हालात पर नजर रख रही हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है।
निगरानी में तकनीकी इस्तेमाल
शहर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए पुलिस की ओर से सीसीटीवी कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाईराइज बिल्डिंग से निगरानी व्यवस्थाएं देखी जा रही है। ड्रोन के जरिए भी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। शहर के बाहर से आने वाले लोगों से धार नहीं आने की अपील की जा रही है। वराह मार्च से जुड़े पोस्टर और बैनर भी हटवा दिए गए हैं। संरक्षित इमारत की सुरक्षा के लिए चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है।
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