लखनऊ: प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों के शत प्रतिशत राजस्व वसूली न कर पाने का खामियाजा अब उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। करीब छह वर्षों बाद बिजली दरें बढ़ाई जा सकती हैं। बिजली दरों में 30 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रस्ताव बिजली कम्पनियों ने दिया है। अभी तक बिजली कम्पनियों के खर्च और कमाई को लेकर निकलने वाले राजस्व गैप के आधार पर विद्युत दरों का निर्धारण किया जाता रहा है। हालांकि इस बार बिजली वितरण कम्पनियों ने दरें बढ़वाने के लिए अलग मंसूबे का प्रस्ताव दाखिल किया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि बिजली बिलों की सौ प्रतिशत वसूली कभी नहीं हो पाती है। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल बिजली बिलों के मुकाबले 88 प्रतिशत की ही वसूली हो पाई थी। इसको लेकर बिजली कम्पनियों ने वास्तविक आय-व्यय के आधार पर लेखा-जोखा नियामक आयोग में दाखिल किया है। प्रदेश सरकार के सब्सिडी देने के बाद भी घाटा बढ़कर 19,600 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। बीते वर्ष के ट्रूअप को देखते हुए कुल घाटा करीब 25 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा। प्रस्ताव के तहत बताया गया कि ट्रांसफार्मरों की क्षतिग्रस्तता वर्तमान में भी 10 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है।
अभियान के बाद भी 54.242 लाख उपभोक्ताओं ने एक बार भी बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। बिल भुगतान न करने वाले उपभोक्ताओं पर 36,353 करोड़ रुपए बकाया है। 78.65 लाख उपभोक्ताओं ने बीते छह महीने से बिल का भुगतान नहीं किया है। इन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का 36,117 करोड़ रुपए बकाया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यूपीपीसीएल और विद्युत वितरण निगमों का कुल खर्च 107,209 करोड़ रुपए रहा।
इसमें बिजली खरीद के लिए 77,013 करोड़ रुपए, परिचालन व अनुरक्षण के लिए 7,927 करोड़ रुपए, ब्याज भुगतान के लिए 6,286 करोड़ रुपए और मूल ऋण के भुगतान के लिए 15,983 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके मुकाबले राजस्व वसूली सिर्फ 67,955 करोड़ रुपए हुई। इस दौरान कुल कैश गैप 39,254 करोड़ रुपए रहा। कैश गैप पूरा करने के लिए 19,494 करोड़ रुपए सब्सिडी दी गई और 13,850 करोड़ रुपए का बजट लॉस फंडिंग/अनुदान के तौर पर सरकार ने मदद दी। बचे 5,910 करोड़ रुपए के कैश गैप को यूपीपीसीएल व विद्युत वितरण निगम ने ऋण लेकर पूरा किया।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में यूपीपीसीएल व डिस्कॉम का कुल खर्च 1,10,511 करोड़ रुपए रहा। बिजली खरीद का खर्च बीते वर्ष से 12 प्रतिशत अधिक और परिचालन व अनुरक्षण खर्च में 6 प्रतिशत अधिक हो गया। कुल खर्च के मुकाबले सिर्फ 61,996 करोड़ रुपए राजस्व वसूली हुई। यह बीते वर्ष के सापेक्ष 8 प्रतिशत कम रही। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि कलेक्शन एफिशिएंसी के आधार पर गैप का निर्धारण असंवैधानिक और मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के खिलाफ है।
प्रदेश में बीते छह वर्षों से बिजली दरें नहीं बढ़ी हैं। वर्तमान बिजली दरें वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही लागू हैं। छह वर्ष पहले बिजली दरों में औसतन 11.69 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। पिछली बार वार्षिक राजस्व आवश्यकता में 9200 करोड़ रुपए का घाटा दिखाया गया था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यूपीपीसीएल व डिस्कॉम ने वास्तविक आय-व्यय के आधार पर संशोधित लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कैश गैप करीब 54,530 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। ऐसे में बीते एक वर्ष में कैश गैप में 23.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और बैंक लोन में 28 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
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