ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज, सुरेश खन्ना ने दिया आश्वासन
खबर सार :-
वित्त मंत्री के इस आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं में कुछ राहत और सकारात्मक उम्मीद देखने को मिली है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि सरकार की ओर से मिला आश्वासन महत्वपूर्ण है, लेकिन जब तक आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वे पूरी सतर्कता बनाए रखेंगे और मामले की निगरानी करते रहेंगे।
खबर विस्तार : -
शाहजहांपुर: नई ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में चल रहे अधिवक्ताओं के आंदोलन ने अब और गति पकड़ ली है। सेंट्रल बार एसोसिएशन शाहजहांपुर के नेतृत्व में आयोजित बैठक और प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद जिले के अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। इसी क्रम में जिले की विभिन्न बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया।
जानकारी के अनुसार, सेंट्रल बार एसोसिएशन शाहजहांपुर के नेतृत्व में जलालाबाद, कलान, पुवायां और तिलहर बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से भेंट की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन वित्त मंत्री को सौंपा, जिसमें नई ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था से उत्पन्न हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों और अधिवक्ताओं की चिंताओं को विस्तार से रखा गया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम जनता और वकीलों दोनों को कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित आदेश के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया जटिल हो गई है, जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी को लेकर अधिवक्ता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अधिवक्ताओं की बात गंभीरता से सुनी और उनकी समस्याओं को जायज बताते हुए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि महानिरीक्षक निबंधन, लखनऊ द्वारा 4 जून 2026 को जारी किए गए विवादित आदेश को निरस्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं और आम जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।
अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका मानना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जमीनी स्तर पर उसकी व्यवहारिकता और प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।
इस बीच बार एसोसिएशनों ने अपने सदस्यों से एकजुट रहने की अपील की है। साथ ही कहा गया है कि यदि आदेश वापस लेने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब होता है तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई और विवादित आदेश को लेकर होने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।
वित्त मंत्री से हुई मुलाकात को अधिवक्ताओं के आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकार आश्वासन को कितनी जल्दी अमल में लाती है और अधिवक्ताओं की मांगों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।
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