Mowgli Girl Death: आज से करीब 10 साल पहले बहराइच के कतरनिया घाट वन्य जीव अभ्यारण के घने जंगलों में एक बच्ची भटकती हुई दिखी थी। लोगों ने इसे मोगली गर्ल का नाम दिया था। जब इसे रेस्क्यू किया गया तो उस समय वो काफी डरी और सहमी हुई थी। इसके बाद मोगली गर्ल का नाम एहसास रखा गया। हालिया जानकारी के अनुसार वह किसी बीमारी से पीड़ित थी और लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ दिया।
मोगली गर्ल का नाम उस समय काफी सुर्खियों में था। मोतीपुर रेंज से गुजरने वाली सड़कों पर अकेली पाई गई थी। मिली जानकारी के अनुसार जब इसे इंसानी दुनिया से परिचित कराया गया तो उसका व्यवहार लोगों को हैरान करने वाला था। वह लोगों से डरती थी और कपड़े पहनने से मना करती थी। वो जानवरों के तरह हाथ और पैर दोनों से चलती थी। इंसानी व्यवहार को नहीं समझ पाती थी और जानवरों की तरह चिल्लाती थी। उसके इस व्यवहार को देखते हुए उसकी तुलना रुडयार्ड किपलिंग के काल्पनिक पात्र 'जंगल बॉय' से की जाने लगी थी। इसमें पात्र का नाम मोगली था। इसी के आधार पर लोग रेस्क्यू से पहले मोगली गर्ल का नाम देने लगे।
बहराइच की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने मोगली गर्ल का नाम पूजा भी रखा था। उसे मोहन रोड स्थित निर्वाण राजकीय बाल गृह विशेषीकृत में इस लड़की को एहसास नाम दिया। अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद उसे 2017 में ही निर्वाण फाउंडेशन लाया गया था। फाउंडेशन के चेयरमैन सुरेश सिंह धापोला के मुताबिक, अस्पताल की कर्माचियों ने उसके ठीक होने की बात की थी। कुछ समय बाद वह लोगों को देखकर खुद को कंबल से ढंकने लगी, धीरे-धीरे कपड़े भी पहनने लगी। कुछ ही समय में वह सहारा लेकर सीधे खड़े होना सीख लिया था। हालांकि वह बोल नहीं पाती थी और लोगों से आंखें चुराती थी।
फाउंडेशन में काम करने वाली एहसास की केयरटेकर रानी कुछ ही समय में उससे काफी लगाव हो गया था। बताया जा रहा है कि रानी ने एहसास का अपनी बेटी की तरह ध्यान रखा। कुछ ही समय में उसने एहसास का भरोसा जीत लिया था। वह लोगों को पहचानने लगी और रानी को अम्मा कहने लगी थी। उसकी मौत पर रानी बहुत दुखी हैं उन्होंने रोते हुए कहा, ''वह मुझे अम्मा कहती थी। मुझे लगा था कि वह ठीक हो जाएगी। अब हमारे पास बस उसकी यादें ही बची हैं।'' धपोला ने बताया कि खानपान और दवा से उसकी सेहत में काफी सुधार आ गया था।
गाजीपुर के एसीपी अनिंद्य विक्रम सिंह ने कहा, ''एहसास गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और उसका इलाज चल रहा था। वह सबसे पहले 8 जून को बीमार पड़ी, जिसके बाद उसे राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और 11 जून को उसे छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उसे वापस रिहैबिलिटेशन सेंटर लाया गया।'' हालांकि इसके कुछ दिन बाद उसकी तबीयत फिर से खराब हो गई। रिहैबिलिटेशन सेंटर के अधिकारियों के मुताबिक 15 जून को उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल गिरकर 40 प्रतिशत हो गया था।
हालांकि डॉक्टरों ने जांच में पाया कि उसका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया, जिस कारण वह मानसिक रुप से ठीक नहीं थी। उसे बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ते थे। लोहिया अस्पताल में उसका लंबे वक्त तक इलाज भी चला। एहसास की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि उसे सेप्टिसीमिया हुआ था। यह फेफड़ों से संबंधित काफी गंभीर बीमारी है, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
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