लखनऊ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने रविवार को लालटेन लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे बिजली कर्मचारियों ने ऊर्जा प्रबंधन पर उपभोक्ताओं को लालटेन युग में ले जाने का आरोप लगाया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एक मंच पर आकर निजीकरण के खिलाफ पुरजोर विरोध दर्ज कराया। उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि 42 जनपदों में असंवैधानिक रूप से निजी कम्पनी को काम दिया गया है। उक्त कम्पनी के अधिकतर एक्सपर्ट एक बड़े कॉरपोरेट ग्रुप के साथ काम कर चुके हैं। इसलिए ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा रहा है। उक्त निजी कम्पनी के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पाए इसके लिए यूपीपीसीएल प्रबंधन ने शक्ति भवन में अघोषित कर्फ्यू सा माहौल बना दिया है। ऊर्जा प्रबंधन नहीं, देश के बड़े उद्योगपति कंसल्टेंट और उनका सहयोग करने वाले नौकरशाह रणनीति बना रहे हैं। निजीकरण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम दे सकें, इसके लिए अभियंताओं और उपभोक्ताओं के शक्ति भवन में कम दिखायी पड़ने की रणनीति बनायी गई है। परिषद ने विभाग के उच्चाधिकारियों पर बड़े भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने और सीबीआई जांच की मांग की, ताकि बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सके। वहीं निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आक्रोशित बिजली कर्मचारियों ने लगातार तीन दिनों तक जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे बीते तीन दिनों से शक्ति भवन पर अनशन में डटे रहे। 04 मई की रात संयोजक शैलेंद्र दुबे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनका ब्लड प्रेशर बढ गया और शुगर लेवल काफी गिर गया। इसके बाद भी अनशन जारी रखा। इसके पूर्व तीन मई को संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में बाइक रैली निकाली थी। वहीं बिजली कर्मचारियों ने 5 मई की रात 8 से 9 बजे तक एक घंटे के लिए अपने घरों की बिजली बंद कर विरोध दर्ज कराया था।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने ऊर्जा प्रबंधन से वार्ता पर सहमति बनने के बाद अनिश्चितकालीन अनशन तोड़ दिया है। समिति ने प्रबंधन से सुधार के मुद्दे पर खुली बातचीत के लिए समय निश्चित करने की मांग की है। इस दौरान वह प्रजेंटेशन भी देंगे। यूपीपीसीएल के अध्यक्ष ने जल्द विस्तृत वार्ता करने के लिए आश्वस्त किया है। प्रबंधन और समिति के बीच वार्ता पर बनी सहमति के बाद निजीकरण को लेकर पांच माह से चल रहे गतिरोध पर फिलहाल विराम लग गया है।
समिति के अनशन को लेकर प्रबंधन को अंततः झुकना पड़ा और वार्ता के लिए बुलाना पड़ा। वार्ता में विद्युत विभाग के निजीकरण, उत्पीड़नात्मक कार्रवाई, संविदा कर्मचारियों की बहाली समेत अन्य मुद्दे शामिल रहे। समिति पदाधिकारियों ने अध्यक्ष से कहा कि सार्थक वार्ता के पहले सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाए। उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रूकने के बाद ही समाधान संभव है।
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