झांसी : स्थानीय लोगों के लिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना और चालान कटवाना आम बात हो गई है। यातायात विभाग के आंकड़ों पर भरोसा करें तो पिछले डेढ़ साल में करीब साढ़े तीन लाख से अधिक चालान काटे जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 12,000 लोगों ने ही चालान भरा है। यह हैरानी की बात है कि आम जनता चालान कटने को गम्भीरता से नहीं ले रही है। लोग बेधड़क ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और लगातार चालान कटवा रहे हैं।
यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ साल में ट्रैफिक पुलिस ने 3.50 लाख से भी ज्यादा चालान काटे हैं। सबसे ज्यादा चालन काटने की कार्रवाई ओवर स्पीडिंग, लालबत्ती को क्रॉस करना, हेलमेट को न पहनने वालों पर की गई है। शहर में चारों तरफ लगे अत्याधुनिक कैमरों की मदद से पुलिस नियमों का उल्लघंन करने वालों का चालान काट रही है लेकिन आम जनता में इस कार्रवाई का भय नहीं दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं सड़क पर लापरवाही व नियम तोड़ते हुए गाड़ी चलाने की वजह से दुर्घटना के होने की संभावना भी बढ़ जाती है। वह सड़क पर अपनी मनमर्जी से वाहनों को चलाते हैं।
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि चालान कटने का मैसेज वाहन स्वामियों तक नहीं पहुंचता लेकिन वह इसको जमा करने में कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। समय पर चालान जमाना न होने से वाहन स्वामियों पर 50 करोड़ से ऊपर का बकाया हो चुका है। यातायात पुलिस का कहना है कि विभाग इसकी वसूली में पसीना बहा रहा है लेकिन अभी तक उसे सफलता मिलती नहीं दिख रही है। ऐसा लगता है कि पुलिस विभाग भी इस समस्या को लेकर बहुत ज्यादा फिक्रमंद नहीं है।
सीओ ट्रैफिक रामवीर सिंह ने बताया जो चालान जमा नहीं कर रहे हैं उनका मामला कोर्ट में भेज दिया जाता है। कोर्ट से वाहन स्वामी के पास सम्मन आता है। इसके बाद उसको चालान जमा ही करना पड़ता है। बिना इसके वह अपनी गाड़ी कभी भी नहीं बेच पाएगा या ट्रांसफर कर पाएगा। उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एवं अन्य कागजात भी नहीं बन पाएंगे।
स्थानीय निवासियों से बात करने पर उनका कहना होता है कि लापरवाह वाहन स्वामियों के ऊपर यातायात एवं पुलिस विभाग को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि ऐसे वाहन स्वामी अपनी जान के साथ-साथ दूसरों की जान भी खतरे में डालते हैं। बेतरतीब गाड़ी चलने से आम जनमानस सड़क पर अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है। पूर्व में चालान का मुद्दा चुनावी मुद्दा भी बन गया था जिसमें अभी के महापौर बिहारी लाल आर्य ने यह जनता से वादा किया था कि उनके आ जाने के बाद इन चलानो को वह निरस्त कराएंगे। यह मुद्दा भी अभी शासन स्तर पर जस का तस पड़ा हुआ है। वाहन स्वामी भी इसी इंतजार में है कि शायद उनके चालान माफ कर दिए जाएं और वह इस वजह से भी चालान जमा नहीं कर रहे हैं।
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