गोलीराव तालाब के निकासी द्वार को दो फीट नीचे किए जाने पर भड़का लोगों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

खबर सार :-

जयपुर ज़िले के चाकसू में ऐतिहासिक गोलीराव तालाब के पानी के निकास यानी स्पिलवे को तोड़े जाने और उसे दो फ़ीट नीचे किए जाने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इससे परेशानी बढ़ सकती है।
गोलीराव तालाब के निकासी द्वार को दो फीट नीचे किए जाने पर भड़का लोगों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

खबर विस्तार : -

जयपुरः जिले के चाकसू कस्बे स्थित ऐतिहासिक गोलीराव तालाब के जल निकासी द्वार (चादर/ढ़काऊ) को कथित रूप से करीब दो फीट नीचे किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों और तालाब संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बदलाव से तालाब में पूरे वर्ष पानी का भराव नहीं हो सकेगा, जिससे जल संरक्षण, भूजल स्तर, मत्स्य पालन और स्थानीय पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लोगों ने प्रशासन से निकासी द्वार को पूर्व की स्थिति में बहाल करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।

जल स्तर में होगी गिरावट

स्थानीय लोगों के अनुसार गोलीराव तालाब का निकासी द्वार पहले अधिक ऊंचाई पर बना हुआ था, जिससे बरसात के दौरान तालाब पूरी क्षमता तक भरने के बाद ही अतिरिक्त पानी बाहर निकलता था। लेकिन हाल ही में निकासी गेट को तोड़कर लगभग दो फीट नीचे कर दिया गया है। उनका कहना है कि अब बारिश शुरू होते ही जितना पानी तालाब में आएगा, उतना ही पानी निकासी द्वार से बाहर निकलता रहेगा। इससे तालाब कभी पूरी तरह नहीं भर पाएगा और अधिकांश समय जल स्तर कम बना रहेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि गोलीराव तालाब केवल जल संग्रहण का साधन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा भी है। तालाब में सालभर पानी रहने से आसपास के किसानों के कुओं का जलस्तर बना रहता है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है। यदि तालाब में पानी का भराव कम हुआ तो भूजल स्तर गिरने की आशंका बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर खेती और आम लोगों की जल आवश्यकताओं पर पड़ेगा।

परिवारों को मिलता है रोजगार

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि तालाब पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वर्षभर पानी रहने के कारण यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन से कई परिवारों को रोजगार मिलता है तथा स्थानीय लोग स्नान और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भी इसी तालाब का उपयोग करते हैं। प्रत्येक वर्ष एकादशी और जलझूलनी ग्यारस के अवसर पर ठाकुर जी का नौका विहार भी इसी तालाब में कराया जाता है, जो क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।

तालाब प्रेमियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निकासी द्वार को तत्काल पूर्व की ऊंचाई पर पुनर्निर्मित कराया जाए, ताकि तालाब की जल संरक्षण क्षमता प्रभावित न हो। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र के लोग धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र समाधान निकालेगा, जिससे ऐतिहासिक तालाब का अस्तित्व और उससे जुड़े जनहित सुरक्षित रह सकें।

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