भीलवाड़ा: भीलवाड़ा शहर के शास्त्री नगर स्थित माँ इच्छापूर्ण माता मंदिर की महंत माँ भक्त पारी माता की सुपुत्री भगवती दीदी के अहमदाबाद में निधन हो जाने से संपूर्ण सिंधी समाज एवं जय माँ प्रेमी परिवार में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। जैसे ही उनके निधन का समाचार नगर में पहुंचा, श्रद्धालुओं और समाजजनों में शोक की लहर दौड़ गई। मंदिर परिसर से लेकर समाजजन के घरों तक मातमी माहौल छा गया। सिंधी समाज के मीडिया प्रभारी मूलचंद बहरवानी ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार शाम को मंदिर प्रांगण से भगवती दीदी की अंतिम यात्रा निकाली गई। इससे पूर्व बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और उनकी पार्थिव देह के अंतिम दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की। सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं और हर कोई उनके अंतिम दर्शन कर भावुक दिखाई दिया।
वे बचपन से ही अपनी माता माँ भक्त पारी दीदी के सानिध्य में मंदिर आश्रम में निवास करती थीं और नियमित रूप से माता के दरबार में भजन-कीर्तन करती थीं। उनकी आवाज में गाए गए भजन श्रद्धालुओं के हृदय को छू जाते थे और वातावरण भक्तिमय हो जाता था। वे न केवल एक भजन गायिका थीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, सेवा और समर्पण की प्रतीक भी थीं। उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। समाजजनों का कहना है कि भगवती दीदी ने अपना संपूर्ण जीवन माँ की सेवा और भक्तों की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहा, बल्कि आश्रम और मंदिर की सेवा को ही अपना जीवन धर्म बनाया। उनके सरल स्वभाव और मधुर व्यवहार के कारण हर वर्ग के लोग उनसे आत्मीयता रखते थे।
श्रद्धांजलि सभा में किन्नर अखाड़ा नसीराबाद की महाराज मुस्कान दीदी, सिंधी समाज के अध्यक्ष रमेश सभनानी, वरिष्ठ समाजसेवी हेमनदास भोजवानी, वीरूमल पुरसानी, चंद्रप्रकाश चंदवानी, पूर्व पार्षद मीना लिमानी, हरीश मानवानी, पूज्य हेमराजमल सेवा समिति के अध्यक्ष गुलशनकुमार विधानी, महामंत्री हरीशकुमार सखरानी, जितेंद्र मोटवानी, मनोहर लालवानी, रमेश गुरनानी, इंदु बंसल, पंकज आडवानी, गौरव धनवानी, चंद्रप्रकाश तुलसानी सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सेवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने श्रीफल, वस्त्र और पुष्प अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इसके पश्चात उनकी पार्थिव देह को स्थानीय पंचमुखी मोक्षधाम ले जाया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें अग्नि को समर्पित किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित जनसमूह ने नम आंखों से भगवती दीदी को अंतिम विदाई दी। भगवती दीदी का जाना न केवल मंदिर परिवार, बल्कि पूरे सिंधी समाज के लिए एक गहरी पीड़ा का विषय है। उनका मधुर कंठ, उनका भक्ति भाव और उनका सेवाभाव सदैव श्रद्धालुओं की स्मृतियों में जीवित रहेगा।
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