ग्वाडलजारा (मैक्सिको): मैदान पर जब दो टीमें बिना किसी खास जोखिम के केवल अगले दौर का गणित बैठाने के लिए खेल रही हों, तो मुकाबला अक्सर उबाऊ हो जाता है। ग्वाडलजारा के एस्टाडियो एक्रोन में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, लेकिन अंततः घरेलू दर्शकों के सामने मैक्सिको ने बाजी मार ली। खेल के 50वें मिनट में दक्षिण कोरियाई गोलकीपर की एक ऐसी भारी चूक हुई, जिसने पूरे मैच का पासा पलट दिया। इस एकमात्र गोल की बदौलत मैक्सिको ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से मात देकर फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली है। इस टूर्नामेंट में अंतिम-16 का टिकट कटाने वाली मैक्सिको पहली टीम बन गई है।
हालांकि, मैदान पर जो खेल दिखा, वह बहुत ज्यादा आकर्षक नहीं था। बमुश्किल कुछ अच्छे मूव देखने को मिले। दोनों ही टीमों के पास रचनात्मकता की भारी कमी साफ नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि दोनों पक्ष केवल अपने पिछले मैचों की जीत के भरोसे मैदान पर वक्त बिताने उतरे हैं।
मैच का इकलौता और निर्णायक गोल पूरी तरह से दक्षिण कोरिया की तरफ से उपहार में मिला। दूसरे हाफ के शुरू होते ही, यानी 50वें मिनट में एक हवा में लहराती हुई गेंद को पकड़ने के लिए कोरियाई गोलकीपर किम स्यूंग-ग्यू अपनी लाइन से काफी आगे आ गए। उन्हें बस उस गेंद को अपने दस्तानों में लेना था। लेकिन हड़बड़ी में वह अपनी ही टीम के डिफेंडर ली की-ह्युक के ऊपर कूद पड़े। इस टक्कर में गोलकीपर की कोहनी डिफेंडर के सिर से टकराई और गेंद उनके हाथ से छिटक कर नीचे गिर गई।
पास में ही मुस्तैद खड़े मैक्सिकन खिलाड़ी लुइस रोमो ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए गेंद को सीधे जाल में उलझा दिया। रोमो का यह उनके 64वें अंतरराष्ट्रीय मैच में पांचवां गोल था। इस गोल ने पूरे स्टेडियम में बैठे घरेलू प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर दिया, जो अब तक खेल की धीमी रफ्तार से थोड़े निराश दिख रहे थे।
मैक्सिको ने भले ही बढ़त बना ली थी, लेकिन मैच के अंतिम पलों में दक्षिण कोरिया ने बराबरी करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। खेल जब अपने आखिरी मिनटों में था, तब मैक्सिकन गोलकीपर राऊल रेंगल ने दो अविश्वसनीय बचाव करके अपनी टीम की जीत पर मुहर लगाई। कोरिया के चो ग्यू-सुंग ने एक शानदार और बेहद तेज हेडर लगाया था, जिसे रेंगल ने नीचे गोता लगाकर किसी तरह रोका। गेंद अभी भी खतरे के दायरे में थी और यांग ह्यून-जुन उस पर शॉट लेने के लिए बिल्कुल तैयार थे। रेंगल ने गजब की शारीरिक चपलता और ताकत का परिचय देते हुए तुरंत खुद को संभाला और दूसरी कोशिश को भी नाकाम करते हुए गेंद को अपने कब्जे में ले लिया। अगर वहां जरा सी भी चूक होती, तो मैक्सिको की जीत का जश्न फीका पड़ सकता था।
यह पहला मौका था जब मैक्सिको की टीम ग्वाडलजारा शहर में कोई फीफा विश्व कप 2026 का मैच खेल रही थी। इसके बावजूद, स्टेडियम पूरी तरह खचाखच भरा हुआ नहीं था। मैदान के बीच के कुछ कॉर्पोरेट टियर साफ तौर पर खाली दिखाई दे रहे थे, जो प्लास्टिक की कुर्सियों की वजह से दूर से ही चमक रहे थे। हालांकि, यह स्थिति दक्षिण कोरिया और चेकिया के बीच हुए पिछले मैच जितनी बुरी नहीं थी, जहां पूरा स्टेडियम लगभग खाली सा लग रहा था। यह मैच पुराने और ऐतिहासिक 71,000 की क्षमता वाले एस्टाडियो जालिस्को में नहीं खेला जा रहा था, जहां 1970 में पेले के शानदार हेडर को गॉर्डन बैंक्स ने रोका था या जहां 1986 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस और ब्राजील के बीच ऐतिहासिक पेनल्टी शूटआउट हुआ था। यह मुकाबला साल 2010 में बने एस्टाडियो एक्रोन में खेला गया, जो मुख्य शहर से करीब 15 मील दूर एक सपाट मैदानी इलाके में स्थित है।
दोनों ही टीमों के खेल में वह आक्रामकता और तड़प बिल्कुल गायब थी जो उनके शुरुआती मैचों में देखने को मिली थी। इसकी वजह इस टूर्नामेंट का प्रारूप भी है। चूंकि दोनों ही टीमें अपना-अपना पहला मैच जीत चुकी थीं, इसलिए उन्हें पता था कि एक ड्रॉ भी उन्हें आसानी से अगले दौर में ले जाएगा। इसी सुरक्षित सोच के कारण किसी भी टीम ने कोई बड़ा जोखिम नहीं उठाया।
हाफ-टाइम से ठीक आठ मिनट पहले जब दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी आपस में ही लगातार बैक-पास खेल रहे थे, तब स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का धैर्य जवाब दे गया। पूरे स्टेडियम में दर्शकों ने गुस्से में सीटियां बजानी शुरू कर दीं। हालांकि, खिलाड़ियों पर इसका कोई खास असर नहीं हुआ और वे अपनी पुरानी रणनीति पर ही टिके रहे।
मैक्सिको और दक्षिण कोरिया के बीच आपसी संबंध हमेशा से बहुत गहरे रहे हैं। मैदान के बाहर दोनों देशों के बीच साल 2012 से ही मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। आज के समय में दक्षिण कोरिया वैश्विक स्तर पर मैक्सिको का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। कोरियाई लोगों का मैक्सिको आने का इतिहास भी साल 1905 से जुड़ा है, जब इलफर्ड नामक जहाज से पहली बार कोरियाई प्रवासी यहां आए थे। फुटबॉल के मैदान पर भी इनकी दोस्ती का एक दिलचस्प इतिहास है। साल 2018 के विश्व कप में जब दक्षिण कोरिया खुद टूर्नामेंट से बाहर हो चुका था, तब उसने जर्मनी को 2-0 से हराकर उलटफेर किया था। उस जीत की वजह से मैक्सिको नॉकआउट में पहुंच पाया था। तब मैक्सिको सिटी में कोरियाई दूतावास के बाहर हजारों मैक्सिकन फैंस जमा हो गए थे और उन्होंने कोरियाई राजदूत को अपने कंधों पर उठा लिया था। तब नारे लगे थे- "कोरियाई भाई, अब तुम मैक्सिकन हो!"
दक्षिण कोरिया की टीम इस मैच में मानसिक तौर पर भी थोड़ी परेशान नजर आई। मैच से ठीक दो दिन पहले एक विवाद सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर दो पत्रकारों ने कप्तान सोन ह्युंग-मिन की सैन्य सेवा को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके विरोध में कोरियाई खिलाड़ियों ने मीडिया से बात करने तक से इनकार कर दिया था। मैदान पर भी कप्तान सोन ह्युंग-मिन बिल्कुल फीके नजर आए। 33 वर्षीय यह स्टार खिलाड़ी मैक्सिको के ऑफसाइड ट्रैप को तोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहा। जब उन्हें गोल करने का एक मौका मिला भी, तो वह गेंद को अपने पैरों के बीच संभाल नहीं पाए। आखिरकार, कोच ने उन्हें मैच के बीच में ही मैदान से बाहर बुला लिया।
इस हार के बाद भी दक्षिण कोरिया के लिए रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अगर वे अपने आखिरी ग्रुप मैच में दक्षिण अफ्रीका को हरा देते हैं, तो वे भी अगले दौर में पहुंच जाएंगे। यहां तक कि एक ड्रॉ भी उन्हें आगे ले जा सकता है, लेकिन जिस तरह का सीमित और नीरस खेल इस टीम ने आज दिखाया है, उसे देखकर यह कहना मुश्किल है कि वे इस टूर्नामेंट में बहुत आगे तक का सफर तय कर पाएंगे। दूसरी ओर, घरेलू टीम मैक्सिको ने भले ही अपने दोनों शुरुआती मैच जीतकर फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट में जगह बना ली हो, लेकिन उनका खेल भी किसी चैंपियन की तरह नहीं दिखा है। वे केवल रक्षात्मक और व्यावहारिक फुटबॉल खेल रहे हैं। अगर अगले दौर में उनका सामना इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम से होता है, तो उन्हें अपनी इस सुस्त रणनीति को बदलना होगा, अन्यथा एस्टेका स्टेडियम में होने वाला मुकाबला उनके लिए बेहद कठिन हो सकता है।
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