Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर बाबा 'महाकाल' को बंधी गई पहली राखी, सवा लाख लड्डुओं का लगा भोग
खबर सार :-
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक है। बाबा महाकाल को ब्रह्मांड का राजा माना जाता है और परंपरा के अनुसार, सबसे पहली राखी उन्हें बंधी जाती है।
खबर विस्तार : -
Raksha Bandhan: पूरे देश में आज रक्षाबंधन का त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। वहीं दुनिया भर में मशहूर श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को जो श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि थी रक्षाबंधन का त्योहार बहुत उत्साह और खुशी के साथ मनाया गया। बाबा महाकाल को ब्रह्मांड का राजा माना जाता है और परंपरा के अनुसार, सबसे पहली राखी उन्हें बंधी जाती है।
भस्म आरती के बाद निभाई गई विशेष रस्म
महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार सुबह 'भस्म आरती' के दौरान रक्षाबंधन की विशेष रस्म निभाई गई। इससे पहले, भगवान महाकाल का 'पंचामृत अभिषेक' किया गया यह दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण से स्नान कराने की एक रस्म है। अभिषेक के बाद, भगवान को भांग, चंदन के लेप और सूखे मेवों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। फिर उन्हें नए वस्त्र पहनाए गए और भव्य रूप से सजाया गया।
जब भस्म आरती शुरू हुई, तो महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भगवान को भस्म लगाई गई। माना जाता है कि भस्म अर्पित करने के बाद, बाबा महाकाल निराकार रूप से साकार रूप में प्रकट होते हैं। इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र शहर उज्जैन आते हैं।
महाकाल को अर्पित की गई विशेष राखी
इस दौरान, पुजारियों के परिवारों की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को अर्पित की गई। ऐसी मान्यता है कि उज्जैन में रक्षाबंधन का त्योहार तब तक आधिकारिक रूप से शुरू नहीं होता जब तक बाबा महाकाल को राखी नहीं बांधी जाती। भगवान को राखी अर्पित करने के बाद ही शहर की बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं।
बाबा महाकाल को लगा सवा लाख लड्डुओं भोग
इस मौके पर भगवान को सवा लाख लड्डुओं का विशेष भोग भी लगाया गया। भस्म आरती के बाद, ये लड्डू श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रसाद के रूप में बांटे गए। पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के जयकारों से गूंज उठा। रक्षाबंधन के इस शुभ अवसर पर उज्जैन में भक्तों का तांता लगा रहा; दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में भाग लिया, बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और उनकी दिव्य कृपा के साथ त्योहार की शुरुआत की।
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं
प्राचीन ग्रंथों में रक्षाबंधन के त्योहार से जुड़ी कई प्रसिद्ध कथाएं मिलती हैं। ये कहानियां बताती हैं कि प्राचीन काल में भी इस त्योहार का कितना बड़ा महत्व था। आज हम आपके साथ रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ ऐसी ही लोकप्रिय कथाएं साझा करने जा रहे हैं।
महाभारत काल की एक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया, तो उनकी उंगली घायल हो गई और उससे खून बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और खून बहने से रोकने के लिए उसे कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी की इस देखभाल और स्नेह से प्रभावित होकर, भगवान कृष्ण ने हर परिस्थिति में उनकी रक्षा करने का वचन दिया। बाद में, कौरवों की सभा में जब द्रौपदी का चीर-हरण करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने उनकी इज्जत बचाकर एक भाई के तौर पर अपना कर्तव्य निभाया।
रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार, यमराज और उनकी बहन यमुना लंबे समय से एक-दूसरे से नहीं मिले थे। एक दिन, यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन के लिए अपने घर बुलाया। यमराज ने अपनी बहन का निमंत्रण स्वीकार किया और उनके घर पहुंचे। यमुना ने अपने भाई का भव्य स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। अपनी बहन की मेहमाननवाजी देखकर यमराज ने उनसे कोई वरदान मांगने को कहा। तब यमुना ने कहा, "आपको हर साल इस दिन मुझसे मिलने आना होगा, और जो भी बहन इस दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेगी, वह आपके भय से मुक्त हो जाएगी।" यमराज ने यमुना को यह वरदान दिया, और माना जाता है कि यमराज हर साल यमुना से मिलने आते हैं। यह कहानी भाई-दूज से जुड़ी है, लेकिन इसे रक्षाबंधन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।
ये भी पढ़ेंः- Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर पीएम मोदी, CM योगी समेत मंत्रियों ने दी शुभकामनाएं
अन्य प्रमुख खबरें
-
सनातन हिंदू एकता रथयात्रा पर निकले पंडित धीरेन्द्र शास्त्री, बोले- गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा देश
2026-10-12
-
धमतरी के शीतला शक्तिपीठ में भक्तों की आस्था, चावल से मिलता है आशीर्वाद
2026-10-12
-
देशभर में घनघनाए घंटे, घर-घर हुई पूजा अर्चना, मां भगवती के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी को नमन
2026-10-12
-
Panchang 12 October 2026: सोमवार 12 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-11
-
Aaj Ka Rashifal 12 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-11
-
नवरात्रि के पहले दिन सूरत के 400 साल पुराने अंबाजी मंदिर में उमड़ी भीड़
2026-10-11
-
प्रथम शैल पुत्री के स्वागत में सजा दिए मंदिर, रात में ही पहुंच गए दर्शन करने श्रद्धालु
2026-10-11
-
Panchang 11 October 2026: रविवार 11 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-10
-
Aaj Ka Rashifal 11 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-10
-
Shardiya Navratri का रविवार से शुभारंभ, जानें मां दुर्गा के आगमन का वाहन
2026-10-10
-
Panchang 10 October 2026: शनिवार 10 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-09
-
Aaj Ka Rashifal 10 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-09
-
Panchang 9 October 2026: शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-08
-
Aaj Ka Rashifal 9 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-08
-
सर्वपितृ अमावस्या पर सिर्फ ये काम करने से पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
2026-10-08