छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में सात पहाड़ियों के बीच माई का मंदिर, दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

खबर सार :-

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सात पहाड़ियों के बीच स्थित माई के मंदिर में नवरात्रि पर भक्तों की भीड़ रहती है। झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में विराजमान पहाड़ी वाली मां, नवरात्रि में उमड़ रहे श्रद्धालु

खबर विस्तार : -

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सात पहाड़ियों के बीच स्थित मलकेतु पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर बना 'पहाड़ी वाली माई' (पहाड़ की देवी) का मंदिर भक्तों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया है। शारदीय नवरात्रि के त्योहार के दौरान, सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है। देवी का आशीर्वाद पाने के लिए न केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न ज़िलों से, बल्कि पड़ोसी राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार से भी श्रद्धालु यहां आते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि जो लोग सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, देवी उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होने के बाद से मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। कुछ लोग खास मन्नत लेकर देवी के दरबार में आते हैं, तो कुछ अपनी मन्नत पूरी होने के बाद पूजा-अर्चना करने आते हैं। ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर का आध्यात्मिक महत्व और यहां का प्राकृतिक माहौल भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

पेड़ के नीचे रखी मूर्ति से शुरू हुई पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसार, 'पहाड़ी वाली माई' मंदिर में पूजा की शुरुआत देवी की एक मूर्ति को पेड़ के नीचे रखकर की गई थी। रामानुजगंज के निवासी अशोक गोंड को देवी के दर्शन होने की मान्यता के बाद यहां धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। शुरुआत में, भक्त पेड़ के नीचे रखी मूर्ति की ही पूजा करते थे। धीरे-धीरे लोगों की आस्था बढ़ती गई और भक्तों के सहयोग से मंदिर का निर्माण किया गया। स्थानीय भक्तों का कहना है कि नियमित पूजा-अर्चना लगभग 2014 में शुरू हुई। इसके बाद, 2015 के आसपास मंदिर के विकास के प्रयास शुरू किए गए। समय के साथ इस जगह को पहचान मिली और अब पड़ोसी राज्यों से भी लोग पूजा करने के लिए यहां आते हैं। 

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नवरात्रि के दौरान भजन-कीर्तन और विशेष पूजा

रामानुजगंज के वार्ड नंबर 14 की रहने वाली शर्मिला कुशवाहा बताती हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में हर सुबह और शाम भजन-कीर्तन होता है। आम दिनों में भी भक्त हर मंगलवार को देवी का आशीर्वाद लेने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। मौसम कैसा भी हो, भक्तों का आना-जाना लगातार चलता रहता है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि देवी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। मंदिर के पुजारी पवन पांडे के अनुसार, नवरात्रि के दौरान भक्त 'अखंड दीप' जलाते हैं और इन नौ दिनों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। अष्टमी के दिन 'भंडारा' (सामुदायिक भोज) का आयोजन किया जाएगा, जबकि नवमी के दिन भक्तों में 'प्रसाद' बांटा जाएगा। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

296 सीढ़ियां और कार से पहुंचने की सुविधा

मलकेतु पर्वत की चोटी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 296 सीढ़ियां बनाई गई हैं। पुजारी पवन पांडे बताते हैं कि भक्तों की सुविधा के लिए लगभग आधा किलोमीटर लंबी कंक्रीट की सड़क भी बनाई गई है, जिससे वे कार से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। इससे बुजुर्गों और उन लोगों को काफी राहत मिलती है जिन्हें सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई होती है। बहुत कम समय में, 'पहाड़ी वाली माई' मंदिर रामानुजगंज के एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में उभरा है। नवरात्रि के दौरान आने वाले भक्त देखते हैं कि इस जगह के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। सात पहाड़ियों के बीच एक ऊंची चोटी पर स्थित यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले भक्तों के लिए भी पूजा का एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया है।

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