स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की गोमाता को पशु सूची से अलग करने की मांग
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि गोमाता को पशु सूची से अलग करें। 81 दिवसीय गविष्ठि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा के समापन के बाद यह मांग हुई।
खबर विस्तार : -
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि गोमाता को पशु सूची से अलग करें। 81 दिवसीय गविष्ठि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा के समापन के बाद यह मांग हुई। ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय तोटकाचार्य गुफा, जोशीमठ (उत्तराखंड) के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर यह मांग की। ज्ञापन में गोमाता को पशु सूची से अलग कर राज्यमाता व राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का आग्रह किया गया है।
कहा गया है कि विधानसभा में प्रस्ताव लाने और केंद्र सरकार को संस्तुति भेजने की प्रक्रिया यूपी सरकार जल्द करे। शंकराचार्य ने मांग की कि 3 मई को गोरखपुर से 81 दिन की यात्रा शुरू हुई थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया गया है। यात्रा में 14,630 किलोमीटर की दूरी तय की गई। 2,403 जनसभाएं आयोजित करते हुए 18 लाख से अधिक लोगों से प्रत्यक्ष संवाद किया गया। ज्ञापन के जरिए बताया गया कि सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया माध्यमों के जरिए करीब 27 करोड़ लोगों तक अभियान पहुंचाया गया है।
सनातन को मानने वाले यह मांग उठाते रहे
इस यात्रा को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना पक्ष रखा और लिखा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-48 में गोवंश संरक्षण पर काम किया जाता है। इस तर्क के आधार पर उत्तर प्रदेश को पहल करना है। यह मांग की गई कि गोमाता को विशेष दर्जा देना चाहिए। ऐसी मांग पहली बार नहीे की गई। सनातन को मानने वाले यह मांग उठाते रहे हैं और अब शंकराचार्य ने भी अभियान को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के कई प्रतिनिधियों और संगठनों का समर्थन लेते हुए बढाया है। उन्होंने जानकारी दी कि मुस्लिम समुदाय की ओर से 81 समर्थन पत्र और ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।
सरकारी दबाव बनाने का आरोप
शंकराचार्य ने सरकार को ज्ञापन भेजा है। इसमें आरोप है कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर कार्यक्रम रद करने का दबाव बनाया गया। यह लोग आयोजक हैं। इन पर सरकारी दबाव बनाया गया। इनको धमकी भी दी गई। देष की राजधानी में इन दिनों संसद सत्र का दौर है। इधर शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री आने वाले विधानसभा सत्र में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव का आग्रह किया है, उनका कहना है कि यह प्रस्ताव यहां से पास हो तो अच्छा है। यह भी जानकारी दी कि यात्रा के दौरान अनेक लोगों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो वे आगामी चुनाव में वर्तमान सरकार या पार्टी को वोट नहीं देंगे। अब देखना यह है कि इस ज्ञापन को सरकार कितना महत्व देती है।
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