राम मंदिर चढ़ावा चोरीः 85 बार हटाई रकम, कपड़े और कमर में छिपाते दिखे

खबर सार :-

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। 133 गवाहों के बयान लिए जाने के बाद रिपार्ट तैयार की गई।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ के खिलाफ चार्जशीट, 85 बार रकम हटाने का दावा

खबर विस्तार : -

अयोध्या, अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चंदा चढ़वा चोरी मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा साक्ष्य सीसीटीवी कैमरे को आधार बनाकर पाए गए हैं। पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपियों के मोबाइल नंबर, मंदिर के सीसीटीवी कैमरे, कॉल डिटेल और आरोपितों की संपत्तियों के लेने देन के अलावा बरामद सामग्री को विवेचना में शामिल किया गया है। इन डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों के बीच लगातार संपर्क और रकम को छिपाने तथा बाहर ले जाने से संबंधित बातचीत की पुष्टि होने का दावा किया गया है। 

रिपोर्ट में मुख्य आरोपी है अविनाश शुक्ला उर्फ शनि

 पुलिस ने इनको प्रमुख साक्ष्य बनाया गया है। अदालत में दिए गए विवेचना रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला उर्फ शनि है। शनि को मंदिर में चढ़ाए गए रकम को 85 बार हटाते हुए देखा गया है। फुटेज के आधार पर बताया था कि चढ़ावा चोरी मामले में और भी लोगों के नाम हो सकते हैं। इस मामले को लेकर राम जन्मभूमि थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

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90/2026 मुकदमा संख्या में क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विवेचना पूरी की। इस मामले पर 22/23 सितंबर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। भारतीय दंड संहिता के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कई धाराएं लगाई गईं। इनमें धारा 316(5), 317(2), 317(5), 61(2) शामिल है। इस मामले को लेकर कई तरह से छिपाने और गुमराह करने की भी कोशिश की गई। इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस ने जो तथ्य दिए हैं, उनके अनुसार गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी अहम पहलू और साक्ष्य बने हैं। मामला जब बढ़ने लगा था, तब इन्हीं कैमरों की फुटेज निकलवा कर जांच पड़ताल शुरू की गई थी। इन फुटेज में चढ़ावे की रकम हटाने और इसमें एक-दूसरे का सहयोग करते हुए देखा गया था। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया है कि अविनाश शुक्ला उर्फ शनि 85 बार रकम उठाते और कपड़ों व कमर में छिपाते देखा गया है। इसने और भी लोगों की मदद की।

फुटेज में चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखा

फुटेज में यह चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखा है। इनके साथ रकम हटाते हुए करुणेश पांडे को भी देखा गया है। करुणेश पाण्डेय दो बार रकम हटाते जबकि 68 बार सह-अभियुक्तों का सहयोग करते दिखाई दिया। अनुकल्प मिश्रा 56 बार सह-अभियुक्तों की मदद करने का आरोप है। इसी तरह उनके सहयोग में लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव के खिलाफ भी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी बनाया गया है।

पुलिस के मुताबिक रमाशंकर मिश्रा भी एक बार चढ़ावे की रकम हटाते हुए फुटेज में दिखाई दिया। उस समय गणना कक्ष प्रभारी सेवानिवृत्ति बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव थे। पुलिस ने अपनी जांच में इन पर संदेश जताया है। इनके खिलाफ आरोप है कि यह गणना कक्ष के प्रभारी थे और जब लोग बाहर आते-जाते थे, तब यही उनका बचाव करते रहे। हवाला यह देते थे कि अपने लोग हैं। परिचित और विश्वसनीय हैं। उनके कहने पर ही सुरक्षा कर्मी उनकी तलाशी नहीं लेते थे। 

विवेचना में 4 जून 2026 से महत्वपूर्ण दिन इसलिए है, क्योंकि इसी दिन 2.25 लाख की नोटों की गड्डियां बाथरूम में छुपाए जाने की जानकारी मिली थी। इस मामले को गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने उठाया था और उसी ने ही तत्कालीन महासचिव चंपत राय के मोबाइल पर एक संदेश और फोटो भेजा था। इसके साथ ही मामले ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया।

कारसेवकपुरम में सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई

पूरी दुनिया में चंदा चोरी के नाम से सनातन को बदनाम करना शुरू कर दिया गया। पुलिस का मानना है कि गेट पर चेकिंग के दौरान जिस किसी के पास रकम थी, पकड़े जाने के दर से उसने बाथरूम में रुपए छुपा दिए थे। अगले दिन कारसेवकपुरम में सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई और उसी के बाद मामले की जानकारी सामने आई। 25 जून को मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशान देही पर आभूषण, रुपए बरामद किए हैं। इसमें विदेशी मुद्रा भी है। 

मामले में नामजद सभी आठ आरोपी अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने 133 गवाहों के बयान लिए और शिकायतकर्ता कृष्णमोहन, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल जी, बैंककर्मी, सुरक्षा कर्मी और फॉरेंसिक ऑडिटर प्रमुख गवाहों में शामिल हैं। 

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