Amit kumar Jha
अमित कुमार झा
भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह। उन्होंने चिंता जताई है, सवाल किये हैं रक्षा सौदों में देरी पर। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले ही दिनों करीब चार दिनों तक विषम स्थिति थी। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों पर निशाना लगाकर अपना जलवा दिखाया था। अब इसके बाद अमर प्रीत सिंह ने सार्वजनिक टिप्पणी रक्षा सौदों की आपूर्ति में देरी को लेकर कर दी है। साथ ही रक्षा जरूरतों को पूरा करने को तेजी से काम करने की वकालत भी की है। स्वदेशी उत्पादन की भी। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा तेजस विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी पर निराशा भी जताई है। इसके बाद से लगातार सवाल उठ रहे हैं, सियासत हो रही है।
वायु सेना प्रमुख की चिंता जायज कही जा रही है। उनके सवालों को भी। बदलते समय और बढ़ती चुनौतियों के बीच कई मसले उठ रहे। सेना के आधुनिकीकरण में और भी तेजी लाने की अपेक्षा की जा रही है। मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के जरिए उत्पादन में बढ़ोत्तरी की आवाज भी उठ रही है। सीआईआई के वार्षिक बिजनेस समिट में 29 मई को एयर मार्शल अमर प्रीत ने कहा कि हथियारों के उत्पादन में देरी नुकसानदायक है। इसके चलते ज्यादातर समझौते पूरे नहीं हो पा रहे हैं। रक्षा परियोजनाओं में हो रही देरी पर अमर प्रीत सिंह ने चिंता व्यक्त की है, खासकर उन परियोजनाओं पर जो भारत में ही बन रही हैं। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा 83 तेजस Mk1A विमानों की डिलीवरी अभी तक नहीं हो सकी है। ये 4.5 जनरेशन के हल्के लड़ाकू विमानों के लिए 2021 में ₹48,000 करोड़ का ठेका दिया गया था। मूल योजना के अनुसार, इनकी डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी। देरी का एक मुख्य कारण जनरल इलेक्ट्रिक से इंजन मिलने में हो रही दिक्कतें हैं, क्योंकि अमेरिकी कंपनी को आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, एयर मार्शल ने भी तेजस Mk1 की डिलीवरी में इस देरी की पुष्टि की है। तेजस Mk2 का प्रोटोटाइप अभी तक नहीं बना है। स्टील्थ AMCA फाइटर का भी कोई प्रोटोटाइप अभी तक नहीं है। दिलचस्प यह है कि यह बात उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में कही। वायुसेना प्रमुख ने भारत में ही हथियार प्रणालियों के डिज़ाइन पर ज़ोर दिया है। उन्होंने सेना और उद्योग जगत से आपसी विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखने का आग्रह किया। उनके अनुसार, अब हमें सिर्फ़ भारत में उत्पादन करने की नहीं, बल्कि डिज़ाइन करने की क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए। सेना और उद्योग के बीच भरोसा होना चाहिए। हमें बहुत खुले रहने की जरूरत है। एक बार जब हम किसी चीज के लिए प्रतिबद्ध हो जाते हैं, तो हमें उसे पूरा करना चाहिए। एयर फ़ोर्स 'मेक इन इंडिया' को सफल बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। सेना को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उद्योग उत्पादन बढ़ाने में 10 साल लगा सकता है, लेकिन सेना आज की जरूरतों को पूरा किए बिना कुशलता से काम नहीं कर सकती। अगले दशक में भले ही उद्योग से उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन हमारी तात्कालिक ज़रूरतें आज की हैं। हमें तेज़ी से मिलकर काम करना होगा, क्योंकि युद्ध हमारी सेना को मज़बूत करके ही जीते जाते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कुछ हफ़्तों बाद, केंद्र सरकार ने मई के अंतिम सप्ताह में स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट - एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) बनाने के लिए एक योजना को मंजूरी दी। अब भारत भी चुपके से हमला करने वाले विमान बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि अभी तक कुछ ही देश ऐसे विमान बनाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायु सेना ने अपनी हवाई क्षमता का प्रदर्शन दिखाया था। कई आतंकी कैंप को ध्वस्त किया था। इसी टकराव के दौरान जंग में लड़ाकू विमानों की अहम भूमिका भी दिखी। पर अब समय वायु सेना प्रमुख की बातों पर भी ध्यान देने का है। भारत के पास विमानों की कमी है। जानकारी के मुताबिक, उसके पास 42.5 स्क्वाड्रन लड़ाकू विमान होने चाहिए। पर अभी हैं केवल 30। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अभी तक स्वदेशी तेजस मार्क - 1A की आपूर्ति नहीं कर पाया है। इसकी वजह से वायु सेना की रक्षा तैयारियों पर असर पड़ रहा है। दरअसल भारत के सामने दो फ्रंट खुले हुए हैं- पाकिस्तान और चीन। चिंता की बात यह है कि जो चीन के पास है, वह किसी न किसी तरह पाकिस्तान के पास पहुंच ही जाता है। हालिया टकराव में ही उसने तुर्किये के ड्रोन और चीन के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। भारत के लिए ताजा रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है कि चीन अपने जे -35 स्टेल्थ फाइटर जेट भी पाकिस्तान को देने जा रहा है। भविष्य में रक्षा उत्पादन बढ़ने की उम्मीद के बावजूद, वर्तमान सैन्य आवश्यकताओं को तुरंत पूरा करना महत्वपूर्ण है। इसमें तत्काल सहयोग और कार्यवाही की आवश्यकता पर बल दिया गया है, क्योंकि किसी भी संघर्ष में जीत के लिए सेना की मजबूती सर्वोपरि है। 100 से अधिक मुल्कों ने भारत से रक्षा उपकरण और हथियार खरीदे हैं। एक दशक में करीब 30 गुना की तेजी आई है।
वायुसेना प्रमुख ए पी सिंह की परियोजनाओं में देरी पर कांग्रेस ने चिंता जताई है। सरकार से सुधारात्मक कदम उठाने की भी मांग की है. कांग्रेस के मुताबिक, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह की परियोजनाओं के पूरे होने में देरी से जुड़ी टिप्पणी चिंता का विषय है। ऐसे में सरकार को जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए. कांग्रेस नेता और तेलंगाना सरकार के मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी हालिया भारत-पाकिस्तान संघर्ष में एक बहुत ही निर्णायक जीत में भारतीय वायु सेना की भूमिका की सराहना करती है. यह सचमुच एक उत्कृष्ट अभियान था. हमें अपनी वायु सेना पर बहुत गर्व है. वायुसेना प्रमुख के हालिया बयान का हवाला देते कहा कि लड़ाकू विमानों और हथियारों की आपूर्ति में गंभीर देरी वायु सेना के लिए एक गंभीर समस्या है. राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, रेवंत रेड्डी और स्वयं उन्होंने कई मौकों पर बताया कि 42 ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है। भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी लड़ाकू स्क्वाड्रन क्षमता को लेकर गंभीर चिंता में है। प्रत्येक ऑपरेशनल स्क्वाड्रन में 16-18 लड़ाकू विमान होने चाहिए, लेकिन भारत के पास वर्तमान में केवल 31 स्क्वाड्रन हैं, जो चीन और पाकिस्तान से उत्पन्न दोहरे सीमा खतरों को देखते हुए बहुत कम है। भारतीय वायुसेना की यह चिंताएं वास्तविक हैं कि वे पूरी शक्ति पर नहीं हैं। दावा किया गया है कि तीनों सशस्त्र बलों में कार्यबल की संख्या में 10% से अधिक की कमी है। कोविड-19 के दौरान धीमी हुई भर्ती प्रक्रिया ने कभी गति नहीं पकड़ी।
रक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की समय पर डिलीवरी न कर पाना वायुसेना के लिए एक गंभीर समस्या है। वायुसेना प्रमुख ने भी इस स्थिति पर अपनी नाखुशी व्यक्त की है, और यह आवश्यक है कि पूरे देश और सरकार को इस वास्तविकता से अवगत होना चाहिए कि हमारे सशस्त्र बलों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। सरकार को इस दिशा में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। वायुसेना को सालाना 35-40 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होती है, जबकि HAL के साथ हुए अनुबंध के तहत उसे हर साल 24 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करनी है, जिसमें भी वह विफल रही है। कुल मिलाकर, भारतीय वायु सेना प्रमुख रक्षा सौदों में हो रही देरी से चिंतित हैं। चाहते हैं कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से काम करे। स्वदेशी उत्पादन पर ध्यान दे। उन्होंने सेना और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की भी बात कही है। इससे देश की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा। उनकी मानें तो अगर हम आज की जरूरतों को पूरा नहीं करेंगे, तो भविष्य में मुश्किल हो सकती है। भारत को आने वाले वक्त में अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। जिस तरह से चीन ने अपनी सेना का आधुनिकीकरण किया है, भारत को भी उस राह पर तेजी से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए डिफेंस प्रोडक्शन को फास्ट ट्रैक करने की जरूरत है। इसमें कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।
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